137. दिल के रिश्ते

रिश्ते खून से ही नहीं बनते,
कुछ लोग दिल से भी जुड़ते।

बिना नाम के बंधन होते,
पर सबसे गहरे स्पंदन होते।

जो मुश्किल में साथ खड़े हों,
वही अपने सच में बड़े हों।

न कोई वंश, न कोई पहचान,
बस अपनापन ही उनकी शान।

कभी दोस्त बनकर आते हैं,
कभी भाई सा साथ निभाते हैं।

बिना कहे जो समझ जाएँ,
वही दिल के करीब आ जाएँ।

सुख-दुख में जो थामे हाथ,
वही होते जीवन का साथ।

खून का रिश्ता मिल जाता है,
दिल का रिश्ता चुना जाता है।

कुछ लोग किस्मत से मिलते हैं,
और आत्मा से जुड़ जाते हैं।

ऐसे रिश्ते अनमोल होते,
हर बंधन से बढ़कर होते।

136. नज़दीकियाँ और माँ की मुस्कान

रखा करो नज़दीकियाँ,

ज़िंदगी का भरोसा नहीं,

कौन कब बिछड़ जाए,

इसका कोई किस्सा नहीं।

आज जो साथ बैठा है,

कल वही दूर हो सकता है।

बातें अधूरी रह जाती हैं,

आँखें नम हो जाती हैं।

फिर कहते हैं लोग अक्सर,

चुपचाप चले गए, बताया भी नहीं।

समय हाथ से फिसल जाता है,

रिश्ता बस याद बन जाता है।

इसलिए अपनों को थामे रखो,

दिल से उन्हें बाँधे रखो।

नाराज़गी लंबी मत करना,

खामोशी गहरी मत करना।

एक गले लगना काफी है,

टूटे मन के लिए वही माफी है।

क्योंकि ज़िंदगी रुकती नहीं,

और मौत बताती नहीं।

इसी जीवन की भीड़ में,

एक सुकून का कोना है।

वो है माँ की हँसी,

जो हर दर्द का सोना है।

हँसती हुई माँ से ज्यादा खूबसूरत कुछ नहीं,

उसकी मुस्कान से बढ़कर कोई सूरत नहीं।

उसकी हँसी में घर बसता है,

उसके बिना सब सूना लगता है।

जब वो मुस्कुराकर देखती है,

हर थकान खुद ही बहती है।

उसके चेहरे की चमक निराली,

जैसे सुबह की पहली लाली।

उसकी हँसी में दुआएँ बसती हैं,

हर संताप वहीं पिघलती हैं।

रातों की नींदें उसने खोईं,

ताकि हमारी राहें हों रोशन हुईं।

उसके आँचल में सारा जहाँ,

वही है मेरा सबसे बड़ा आसमाँ।

इसलिए अपनों से प्यार जताओ,

माँ को हर दिन गले लगाओ।

नज़दीकियाँ ही असली धन हैं,

रिश्ते ही जीवन के वन हैं।

कल का भरोसा किसने देखा,

आज को ही अपना लेखा।

हँसती रहे माँ हर सुबह-शाम,

यही है जीवन का सबसे सुंदर नाम।

134. सच्चों की सज़ा

तीन लोग अक्सर परेशान दिखे।
वफादार, मददगार, दिल के सच्चे।

जो सच के साथ खड़े रहते हैं,
वही अक्सर अकेले रहते हैं।

जो हरदम साथ निभाते हैं,
वही सबसे ज्यादा आज़माए जाते हैं।

जो बिना स्वार्थ के हाथ बढ़ाते हैं,
वही तानों से नवाज़े जाते हैं।

जिनके इरादे पाक होते हैं,
उनके रास्ते ही कठिन होते हैं।

बाकी दोगले मुस्कुराते हैं,
हर माहौल में ढल जाते हैं।

चापलूस हर दर पर सजते हैं,
हर कुर्सी के आगे झुकते हैं।

सच बोलने वाले खटकते हैं,
झूठ बोलने वाले चमकते हैं।

पर वक्त की अपनी पहचान है,
उसका न्याय बड़ा महान है।

जो भीतर से सच्चे होते हैं,
अंत में वही ऊँचे होते हैं।

दोगलापन ज्यादा चल नहीं पाता,
झूठ ज्यादा पल नहीं पाता।

133. उन्नति ही उत्तर

बेइज़्ज़ती का जवाब उन्नति है।
अपमान का उत्तर प्रगति है।
          जो ताने सुनाए गए,
          उन्हें लक्ष्य बनाना चाहिए।
जो हँसे थे राह में,
उन्हें परिणाम दिखाना चाहिए।
          आँसू बहाकर क्या मिलेगा,
          हौसला बढ़ाकर सब मिलेगा।
गिरकर उठना सीख लो,
चुप रहकर जीतना सीख लो।
          शोर से नहीं पहचान बनती,
          मेहनत से उड़ान बनती।
अपमान एक परीक्षा है,
साहस की परिभाषा है।
          जो भीतर आग जला दे,
          वही किस्मत बदलवा दे।
बदला शब्दों से नहीं,
कर्मों से लिया जाता है।
         सम्मान माँगा नहीं जाता,
         योग्यता से पाया जाता है।
इसलिए समय को साथी बनाओ,
खुद को इतना ऊँचा उठाओ।
          कि जिनकी नज़रें झुकी न थीं,
          वो खुद नज़रें झुका जाएँ।

132. सच्ची अमीरी

जो कम में खुश है, वही अमीर है,
जिसका मन संतुष्ट है, वही धनी है।

          सोने-चाँदी से क्या होगा,
          अगर दिल में कमी होगी।

थाली में सादा रोटी सही,
पर चेहरे पर मुस्कान सही।

          छोटा सा घर अगर अपना हो,
          तो महल भी फीका सपना हो।

जिसे चाहतें सीमित रखनी आएँ,
उसे चिंताएँ छू न पाएँ।

          लालच की आग जो बुझा दे,
          वही जीवन को सजा दे।

कम साधन पर ऊँचे विचार,
यही हैं असली उपहार।

          जिसे हर पल का धन्यवाद है,
          उसी के पास असली प्रसाद है।

न शिकायत, न कोई ग़म,
बस संतोष से भरा हर दम।

          जिसकी नींद सुकून भरी है,
          वही दौलत सबसे बड़ी है।

खुशियों का जो रखवाला है,
वही किस्मत का मतवाला है।

          इसलिए कम में खुश रहना सीखो,
          यही अमीरी दिल में !

131. खामोश बद्दुआएँ

उन बद्दुआओं से डरो,
जो बोलकर नहीं दी जातीं।

जो आँसुओं में घुलती हैं,
पर होंठों तक नहीं आतीं।

जो दिल के भीतर सुलगती हैं,
पर आवाज़ नहीं बन पातीं।

जिसे दर्द ने जन्म दिया,
और चुप्पी ने पाला।

जहाँ भरोसा टूट जाता है,
वहीं श्राप पनप जाता है।

मासूमियत जब रोती है,
किस्मत भी कहीं सोती है।

जिसका हक़ तुमने छीना,
वो ऊपर तक जाता है।

जिसे तुमने तुच्छ समझा,
वही समय समझाता है।

खामोश आहें हल्की नहीं होतीं,
उनकी चोटें दिखती नहीं होतीं।

वो दुआ बनती नहीं,
पर असर कर जाती हैं।

इसलिए दिल न दुखाओ,
किसी को यूँ न रुलाओ।

क्योंकि खामोश बद्दुआएँ,
वक्त पर हिसाब चुकाती हैं।

130. देर से मिली पहचान

अच्छाई की पहचान श्मशान में होती है।
     जीते जी इंसान अनदेखा रहता है।

साँसें चलती हैं,
     पर कद्र नहीं मिलती।

जिसने साथ निभाया,
     उसी को ठुकराया।

जिसने खुद को जलाया,
     उसे ही रुलाया।

चिता की आग उठती है,
     तब सच्चाई दिखती है।

लोग कहते हैं,
     वो बहुत अच्छा था।

दिल से सच्चा था,
     सबका अपना था।

जीते जी चुप्पी थी,
     अब सबकी स्वीकृति है।

ये कैसी रीति है,
     देर से प्रीति है।

जब धड़कन रुक जाती है,
     तब तारीफ जग जाती है।

इसलिए अभी सम्मान दो,
     जीते जी पहचान दो।

अच्छाई को प्रतीक्षा क्यों,
     सम्मान को परीक्षा क्यों।

129. गृह क्लेश का दर्द

मनुष्य हर दुःख को सह लेता है,
समय के संग खुद को ढाल लेता है।

पर जब घर में अशांति बस जाती है,
आत्मा भीतर से कांप जाती है।

बाहर की ठोकरें कम लगती हैं,
घर की चोटें गहरी लगती हैं।

जहाँ सुकून का आँगन होना था,
वहीं तनाव का कोना होना था।

दीवारें जब गवाह बन जाती हैं,
खामोशियाँ भी चुभने लग जाती हैं।

मीठे शब्द जब विष बन जाएँ,
अपने ही दिल को छल जाएँ।

मनुष्य सब कुछ सह जाता है,
पर घर का क्लेश तोड़ जाता है।

थका हुआ जब वो लौटकर आए,
और अपनापन भी दूर नज़र आए।

तब साहस भी डगमगा जाता है,
विश्वास भी बिखर सा जाता है।

गृह शांति ही असली धन है,
यही जीवन का पावन वन है।

जहाँ प्रेम का दीप जलता है,
वहीं हर दुःख हल्का पड़ता है।

इसलिए शब्दों में मधुरता लाओ,
घर को मंदिर सा बनाओ।

क्योंकि घर ही जब संबल बनता है,
तभी मनुष्य सच्चा जीवन जीता है।

128. सत्य की गरिमा

“सत्य से मिली हार” भी महान होती है,
“असत्य से मिली जीत” कहाँ सम्मान होती है।

झूठ की चमक क्षणिक सी होती है,
सच की रोशनी अनंत होती है।

हार कर भी जो सिर ऊँचा रखे,
वही जीवन की असली जीत चखे।

सत्य का मार्ग कठिन जरूर है,
पर अंत उसका ही भरपूर है।

असत्य की सीढ़ी ऊँची लगती है,
पर नींव उसकी खोखली रहती है।

क्षणभर का लाभ भले मिल जाए,
पर आत्मा सुकून न पा पाए।

सच कभी झुकता नहीं है,
समय के आगे रुकता नहीं है।

ईमान की राह भले अकेली हो,
पर मंज़िल उसकी सुनहरी हो।

हार भी जब सच्चाई से मिले,
वो चरित्र को और प्रखर करे।

झूठ की जीत ताज नहीं होती,
वो भीतर से राज नहीं होती।

इसलिए सत्य को ही साथी बनाओ,
चाहे काँटों में ही क्यों न जाओ।

क्योंकि अंत में वही अमर कहलाता है,
जो सच के लिए हर दर्द उठाता है।

127. सेहत ही असली संपत्ति

सबसे पहले अपनी सेहत का ध्यान रखो,
जीवन की नींव को मजबूत रखो।

धन-दौलत सब बाद में आती है,
स्वास्थ्य ही असली कमाई कहलाती है।

जिसका तन साथ छोड़ देता है,
वो मन से भी टूटने लगता है।

रिश्ते चाहें कितना भी निभाएँ,
बीमारी सब पर भारी पड़ जाए।

जो स्वस्थ है वही समर्थ है,
उसी का हर कदम प्रभावशाली है।

सुबह की हवा में जीवन बसता है,
थोड़ा अनुशासन ही सच्चा रास्ता है।

समय पर भोजन, समय पर विश्राम,
यही है खुशियों का असली धाम।

तन की थकान को पहचानो,
मन के संकेतों को भी जानो।

क्योंकि जब स्वास्थ्य बिगड़ जाता है,
इंसान खुद से भी दूर हो जाता है।

अपनों पर बोझ बनना किसे भाता है,
स्वाभिमान तभी तो मुस्कुराता है।

इसलिए आज से ये प्रण करो,
अपने शरीर का सम्मान करो।

स्वस्थ रहोगे तो रिश्ते खिलेंगे,
जीवन के हर रंग फिर

126. धोखे का कर्ज

किसी को धोखा देना एक कर्ज है,
जो लौटकर आता है, यही सच है।

     आज तुम मुस्कुरा कर बच जाओगे,
     कल अपने ही जाल में फँस जाओगे।

विश्वास कोई खिलौना नहीं होता,
जो टूटे तो फिर सलोना नहीं होता।

     झूठ की नींव बहुत कमजोर होती है,
     सच की दीवारें ही मजबूत होती हैं।

जिस दिल को तुमने तोड़ा है,
वक़्त ने सब कुछ जोड़ा है।

     कर्मों का हिसाब चुपचाप चलता है,
     हर अन्याय का पलड़ा पलटता है।

धोखा देकर जो जीतते हैं,
वो भीतर से रोज़ ही हारते हैं।

     आँखों की नींद उड़ जाती है,
     आत्मा सच्चाई पुकारती है।

दूसरों का हक जो मारोगे,
अपने हिस्से का सुख हारोगे।

     वक़्त बड़ा न्यायाधीश है,
     हर इंसाफ़ का साक्षी है।

इसलिए सच्चाई का साथ निभाओ,
रिश्तों में ईमान का दीप जलाओ।

     क्योंकि धोखे का हर एक वार,
     लौटकर करता है दिल पर प्रहार।

125. उम्र से परे मोहब्बत

मोहब्बत का ताल्लुक उम्रों से नहीं होता,
मनपसंद शख़्स हर उम्र में खूबसूरत होता।

ये झुर्रियों में भी नूर खोज लेती है,
सफेद बालों में भी चाँद बो देती है।

ये दिल की धड़कनों से रिश्ता बनाती है,
समय की दीवारों को खुद गिराती है।

न उम्र की सरहद इसे रोक पाती है,
न सालों की दूरी इसे मिटा पाती है।

जब नाम तुम्हारा लबों पर आता है,
हर मौसम बसंत बन जाता है।

तुम हँसो तो सुबह सी लगती हो,
चुप रहो तो दुआ सी लगती हो।

तेरी सादगी में भी जादू है,
तेरी आँखों में पूरा काबू है।

साल गुजरें तो क्या फर्क पड़ता है,
इश्क़ तो हर रोज़ नया सा लगता है।

चेहरे बदलें, दिल नहीं बदलते,
सच्चे जज़्बात कभी नहीं ढलते।

मोहब्बत को गिनती नहीं आती,
ये बस महसूस होना जानती।

तू साथ रहे तो उम्र ठहर जाती है,
तेरी बाहों में हर शाम सँवर जाती है।

इश्क़ की रौशनी ऐसी गहरी है,
हर उम्र में तू मेरी ही है।

124. स्वयं से संवाद

स्वयं से उलझना संघर्ष है,
     दूसरों में उलझना व्यर्थ है।

जो भीतर झाँकना सीख गया,
     वही जीवन का अर्थ जान गया।

अपनी कमियों से जो लड़ा,
     वही असली रण में खड़ा।

दुनिया को बदलना आसान नहीं,
     खुद को बदलना असंभव नहीं।

आईना कभी झूठ नहीं कहता,
     मन का सच यूँ ही नहीं बहता।

दोष जगत में ढूँढना सरल है,
     पर आत्ममंथन ही सफल है।

हर हार में सीख छुपी होती है,
     हर चुप्पी में चीख छुपी होती है।

जो स्वयं को जीत गया,
     वही हर बंधन से मुक्त हुआ।

मन के संशय जब मिटते हैं,
     तभी नए संकल्प जन्म लेते हैं।

दूसरों से कैसी होड़ यहाँ,
     अपनी ही बनानी है पहचान।

संघर्ष को मित्र बना ले तू,
     अपना भाग्य स्वयं गढ़ ले तू।

स्वयं से जो सुलह कर लेता है,
     वही जीवन सच में जी लेता है।

123. साफ़ दिलों की दुनिया

जो इंसान दिल के साफ होते हैं,
     वो कम ही लोगों के खास होते हैं।

भीड़ में भी तनहा दिखते हैं,
     सच के रास्तों पर ही चलते हैं।

झूठ का सहारा लेते नहीं,
     किसी का दिल यूँ तोड़ते नहीं।

बातें उनकी सीधी होती हैं,
     नज़रें कभी झुकी नहीं होती हैं।

दुनिया अक्सर उन्हें परखती है,
     हर मोड़ पर थोड़ा कसती है।

मगर वो फिर भी मुस्काते हैं,
     अपनी फितरत नहीं बदल पाते हैं।

लालच से खुद को दूर रखते हैं,
     रिश्तों में सच्चाई भरते हैं।

उनकी चुप्पी भी बोलती है,
     हर धड़कन सच तोलती है।

ऐसे लोग नायाब होते हैं,
     भीतर से जैसे आफ़ताब होते हैं।

वो दिखावे से परे रहते हैं,
     भीड़ में भी सधे रहते हैं।

कम लोग उन्हें समझ पाते हैं,
     जो समझें वही उनके खास बन जाते हैं।

122. जिम्मेदारियों की शाम

खुद कमाकर जब घर का खर्च उठाया,
     तब जीवन का असली अर्थ समझ आया।

रोटी की कीमत पसीने से जानी,
     हर खुशी के पीछे छिपी थी कहानी।

पापा जो चुपचाप शाम को बैठते थे,
     अब समझा क्यों वो खामोशी सहते थे।

दिनभर की थकान चेहरे पर होती थी,
     पर होठों पर मुस्कान ही सोती थी।

जिम्मेदारियों का बोझ कंधों पर था,
     पर परिवार ही उनका असली घर था।

अपनी इच्छाएँ अक्सर टाल देते थे,
     हमारे सपनों को पहले डाल देते थे।

जेब भले हल्की हो जाती थी,
     पर हिम्मत कभी कम न हो पाती थी।

अब जब खुद कमाकर लौटता हूँ,
     थका हुआ सा दरवाज़े पर रुकता हूँ।

समझ आता है वो मौन इशारा,
     जिसमें छुपा था प्यार सारा।

पापा की वो अकेली शामें,
     दरअसल थीं त्याग की थामें।

अब ठान लिया है मन में ये,
     उनके सपनों को भी जियूँगा मैं।

संघर्ष को सम्मान दूँगा हर दिन,
     उनकी विरासत बनाऊँगा अपनी पहचान में।

121. संबंधों का वृक्ष

संबंध ही एक ऐसा वृक्ष है
     जो भावनाओं के सामने झुक जाता है

स्नेह की मिट्टी से अंकुरित होता है
     और विश्वास की बारिश से सींचा जाता है

प्यार की धूप में धीरे-धीरे बढ़ता है
     मन के आँगन में चुपचाप खड़ा रहता है

मीठे शब्द इसकी जड़ें मजबूत करते हैं
     झूठे वचन इसे अंदर से तोड़ देते हैं

सादगी की हवा इसे जीवन देती है
     सम्मान की छाया इसे शांति देती है

क्रोध की आँधी इसे घायल कर जाती है
     अहंकार की चिंगारी इसे जलाकर जाती है

रिश्तों का सच बहुत नाजुक होता है
     एक गलत शब्द भी भारी बोझ होता है

संबंधों को दिल से संभालकर रखना
     स्नेह के जल से हर दिन सींचते रहना

संबंध ही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है
     इसी में खुशियों की असली गूंज है

120. साफ दिल की दुनिया

जो इंसान दिल के साफ होते हैं
वो कम ही लोगों के खास होते हैं

उनकी सादगी में अपना सा एहसास होता है
चुप रहकर भी दिल के पास होता है

झूठ की दुनिया से वो थोड़ा दूर रहते हैं
सच की राहों को ही मंज़ूर रहते हैं

मुस्कान उनकी जैसे सुबह की किरण हो
हर दर्द में भी उनके भीतर धैर्य का मन हो

वो दिखावे की भीड़ में खोना नहीं चाहते
अपनी पहचान को कभी धोना नहीं चाहते

रिश्तों को दिल से निभाना जानते हैं
थोड़े लोगों में ही खुश रहना जानते हैं

वो शब्दों से नहीं, कर्मों से पहचाने जाते हैं
सादगी के दीपक हर जगह जलाते हैं

साफ दिल वाले ही असली अमीर होते हैं
प्यार के सफ़र में सबसे करीब होते हैं

119. घमंड का अँधेरा

घमंड के अंदर बुरी बात यही होती है
वो कभी महसूस नहीं होने देता कि तुम गलत हो

अहंकार चुपके से मन में घर कर जाता है
सच को भी अपने रंग में ढलने को कहता है

जो झुकना जानता है वही ऊँचा उठता है
घमंड का पौधा अक्सर खुद ही सूखता है

अहंकार में डूबा दिल सच नहीं सुन पाता
अपने ही शब्दों का भार सह नहीं पाता

गलती हर इंसान से कभी न कभी होती है
मगर घमंड में छिपकर आँखें बंद रहती हैं

सच की आवाज़ को सुनना बड़ा कठिन होता है
अहंकार का साया बड़ा घना घिरा होता है

जो अपने को सही समझता है, वही हार जाता है
समय के आगे आखिर सब कुछ झुक जाता है

नम्रता ही जीवन की असली पहचान है
सादगी में छिपा सबसे बड़ा सम्मान है

घमंड के अँधेरे में खुशियाँ खो जाती हैं
सच की राहें ही दिल तक लौट आती हैं

118. सोने के हिरण नहीं होते

चौदह वर्ष वनवास सहा, एक उम्र कटी रोते-रोते
तब जाकर बात समझ आई, सोने के हिरण नहीं होते

सपनों के पीछे भागना भी कभी अंधा रास्ता है
हर चमकती चीज़ में अक्सर झूठा सा अहसास है

माया के जाल बड़े ही चुपके से फैलते हैं
मन के सच्चे मोती धीरे-धीरे ही मिलते हैं

जो दिखता है सोना, वह सच में सोना नहीं होता
हर चमकता चेहरा अपने भीतर रोना नहीं होता

आशाओं के जंगल में भ्रम भी पनप जाते हैं
स्वार्थ के पंछी भी मीठे गीत सुनाते हैं

धैर्य ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा है
सच का दीपक ही सबसे उजला तारा है

दुनिया के रंगों में खुद को मत खो देना
झूठी दौलत की नींद में सपनों को मत सोना

कठिन तपस्या ही मन का सोना बनाती है
सादगी की राह ही असली मंज़िल पाती है

समय सिखाता है सबक धीरे-धीरे
सोने के हिरण नहीं होते, समझ लो दिल के घेरे

117. काँटों और महलों का सच

काँटों में रहकर भी फूल सुखी है
     महलों में रहकर भी इंसान दुखी है

फूलों ने दर्द को चुपचाप सहना सीख लिया
     अपनी खुशबू को हर हाल में कहना सीख लिया

काँटे भी अपनी जगह पर मुस्कुराते हैं
     चुपचाप रहकर अपना धर्म निभाते हैं

महलों की चमक में भी मन उदास होता है
     अक्सर वहाँ भी कोई सपना अधूरा होता है

सादगी की मिट्टी में सुकून बसता है
     सच्चा दिल ही जीवन का सच समझता है

दौलत कभी खुशी की गारंटी नहीं होती
     झूठी शोहरत भी दिल की दवा नहीं होती

छोटे घरों में भी प्यार खिल जाता है
     रिश्तों का दीपक हर दर्द पी जाता है

काँटों की गोद में भी फूल महकते हैं
     सच्चे लोग हर हाल में खुश रहते हैं

महलों में रहने वाला भी तरस जाता है
     जब अपना ही साया उससे दूर चला जाता है