“सत्य से मिली हार” भी महान होती है,
“असत्य से मिली जीत” कहाँ सम्मान होती है।
झूठ की चमक क्षणिक सी होती है,
सच की रोशनी अनंत होती है।
हार कर भी जो सिर ऊँचा रखे,
वही जीवन की असली जीत चखे।
सत्य का मार्ग कठिन जरूर है,
पर अंत उसका ही भरपूर है।
असत्य की सीढ़ी ऊँची लगती है,
पर नींव उसकी खोखली रहती है।
क्षणभर का लाभ भले मिल जाए,
पर आत्मा सुकून न पा पाए।
सच कभी झुकता नहीं है,
समय के आगे रुकता नहीं है।
ईमान की राह भले अकेली हो,
पर मंज़िल उसकी सुनहरी हो।
हार भी जब सच्चाई से मिले,
वो चरित्र को और प्रखर करे।
झूठ की जीत ताज नहीं होती,
वो भीतर से राज नहीं होती।
इसलिए सत्य को ही साथी बनाओ,
चाहे काँटों में ही क्यों न जाओ।
क्योंकि अंत में वही अमर कहलाता है,
जो सच के लिए हर दर्द उठाता है।