हँसती हुई माँ से ज्यादा खूबसूरत कुछ नहीं,
उसकी मुस्कान से बढ़कर कोई सूरत नहीं।
उसके चेहरे की चमक में सवेरा होता है,
उसकी हँसी में ही मेरा बसेरा होता है।
थकी हुई आँखों में भी उजाला रखती है,
अपने दुखों को हमेशा ताला रखती है।
मेरी जीत पर जो सबसे पहले खिलती है,
वो माँ ही है जो दिल से मिलती है।
उसकी हँसी में दुआओं की छाया है,
उसने ही तो जीवन सजाया है।
रातों की नींदें जो उसने गँवाईं,
मेरी हर खुशी में वो मुस्कुराईं।
उसके आँचल में सारा जहाँ है,
उसके बिना सब वीरान है।
जब माँ खुलकर हँसती है,
तब किस्मत भी सजती है।
उसकी मुस्कान ही मेरी दौलत है,
उसकी खुशी ही मेरी इबादत है।
माँ की हँसी में रब दिखता है,
हर दर्द वहीं आकर सिमटता है।
दुनिया की हर चमक फीकी है,
माँ की हँसी ही असली दीखी है।
हँसती रहे वो यूँ ही हरदम,
यही है मेरी सबसे बड़ी सरगम।
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