111. रिश्ते

कुछ रिश्ते जीवन के अनमोल खजाने होते हैं।
ये जीवन के सुंदर और सुहाने होते हैं।
हर धड़कन में एहसास छुपा होता है।
दिल के करीब कोई अपना होता है।

कुछ रिश्ते बिना नाम के ही बन जाते हैं।
सूखे पेड़ पर जैसे फूल खिल जाते हैं।
कभी दोस्ती, कभी प्रेम का रूप लेते हैं।
जीवन का अर्थ भी धीरे दे देते हैं।

संग उनके हर दर्द हल्का लगने लगता है।
बंजर मन में भी फूल खिलने लगता है।
खुशियों के रंग जीवन में भर जाते हैं।
कुछ रिश्ते जन्नत सा सुख दे जाते हैं।

सच्चे भावों की खुशबू साथ रहती है।
दिल की धड़कन भी कुछ कहती है।
अपनापन धीरे से घर करता है।
मन भी शांति का वर करता है।

कुछ रिश्ते यादों में बस जाते हैं।
जीवन का संगीत बन जाते हैं।
यही रिश्तों का सच्चा सार है।
रिश्तों में ही जीवन का प्यार है।

110. अंत का सच

क्यों गुरुर चार दिन के ठाठ पर।
मुट्ठी खाली घाट की राह पर।

दुनिया का खेल भी खत्म होगा।
अंत में सब पीछे छूटेगा।

धन भी यहीं रह जाएगा।
मान भी यहीं सो जाएगा।

शोहरत की चमक मिट जाएगी।
सिर्फ यादें संग रह जाएँगी।

घमंड का बोझ कभी मत लेना।
सादगी को दिल में ही रखना।

समय से बड़ा कोई नहीं।
सच से बड़ा कोई नहीं।

आज मुस्कान सबको देना।
दर्द में भी हाथ बढ़ाना।

दिल किसी का मत दुखाना।
इंसानियत को साथ निभाना।

जीवन एक क्षण का मेला है।
हर इंसान यहाँ अकेला है।

अंत में खाली हाथ जाना।
यही जीवन का सच माना।

109. पतझड़ का वादा

हर पतझड़ एक वादा है।
कि बसंत फिर आएगा।
उसी सूखी शाखा पर।
नया फूल खिल जाएगा।

पत्ते झड़ना भी सीखाते हैं।
समय बदलना भी बताते हैं।
जो टूटता है, वही बनता है।
संघर्ष से जीवन सजता है।

धैर्य रखो, मौसम बदलेगा।
अंधेरा भी एक दिन ढलेगा।
हवा नए गीत सुनाएगी।
धरती फिर मुस्कुराएगी।

हर खालीपन भर जाएगा।
हर दर्द भी मिट जाएगा।
उम्मीद का दीप जलाए रखना।
दिल में विश्वास बनाए रखना।

पतझड़ भी एक संदेश देता है।
नया जन्म हमेशा लेता है।
संघर्ष ही पहचान बनाएगा।
बसंत फिर लौटकर आएगा।

108. अपनी क़ीमत पहचानो

जीवन में उसे प्राथमिकता मत दो।
जो तुम्हें सिर्फ विकल्प समझता हो।
जो तुम्हें वक्त मिले तभी याद करे।
और अपने मतलब से ही बात करे।

     दिल की जगह शर्तें रखे जो।
     प्यार में भी गणित करे जो।
     ऐसे रिश्तों से दूरी रखो।
     अपने सम्मान को आगे रखो।

जो सच में अपना होगा।
वो हर हाल में साथ होगा।
मुश्किल में हाथ बढ़ाएगा।
और दिल से रिश्ता निभाएगा।

     खुद को कभी कम मत समझो।
     दूसरों के लिए मत बदलो।
     अपनी पहचान बनाए रखना।
     सच की राह अपनाए रखना।

विकल्प बनना भी अपमान है।
स्वाभिमान ही सबसे महान है।
जो तुम्हें चुनता है दिल से।
वही रहेगा जीवन की मंज़िल से।

107. नेता जी का खेल


एक कामयाब नेता वही कहलाए।
जो अपने बच्चों को विदेश पहुँचाए।
दूसरों के बच्चों को मैदान में लगाए।
धार्मिक जुलूसों में उन्हें घुमाए।

घर के बच्चों को डॉलर कमाने भेजे।
और जनता को देशभक्ति के बीज दे।
बाहर पढ़ाई, अंदर लड़ाई चलती है।
कुर्सी की दुनिया बड़ी रंगीली लगती है।

भाषण में सेवा का राग सुनाए।
पीछे से अपना काम बनाए।
वोट के मौसम में मुस्कान बिखेरे।
बाद में अपने वादे ही घेरे।

सड़क भी बने, पर फोटो भी हो।
घोषणा भी हो, पर नोट भी हो।
समस्याएँ धीरे चलती जाएँ।
फाइलें कुर्सी पर ही सो जाएँ।

जनता हँसे या रोती रहे।
नेताजी की गाड़ी दौड़ती रहे।
यह भी राजनीति का मज़ाक है।
लोकतंत्र में थोड़ा सा नाटक है।

106. समझदारी का रास्ता


होशियार होना अच्छी बात है।
पर घमंड करना गलत बात है।
दूसरों को मूर्ख समझना भूल है।
यही जीवन का असली मूल है।

ज्ञान बढ़े तो विनम्र बनो।
अहंकार को मन से कम करो।
अपनी समझ पर गर्व करो।
पर सबका सम्मान भी करो।

हर इंसान अलग सोच रखता है।
हर दिल अपना सच कहता है।
सबको एक जैसा मत मानो।
समझदारी का अर्थ पहचानो।

जो ज्यादा जानता है, चुप रहता है।
जो सच्चा है, धैर्य से रहता है।
दूसरों को नीचा दिखाना नहीं।
इंसानियत को मिटाना नहीं।

होशियार बनो, मगर सरल रहो।
दिल में सच्चाई लेकर चलो।
यही सबसे बड़ी समझदारी है।
यही जीवन की जिम्मेदारी है।

105. गद्दार की पहचान

जब दुश्मन हर राज़ से बाक़िफ़ हो।
तो समझ लेना दोस्त ग़द्दार है।
     मीठी बातों के पीछे जहर छुपा।
     ऐसा भी कोई किरदार है।
हर मुस्कान सच्ची नहीं होती।
हर चमक सोने जैसी नहीं होती।
     कभी नज़दीकी भी धोखा देती है।
     अंदर ही अंदर चोट देती है।
जो ज्यादा अपना बनने लगे।
वही अक्सर दूर जाने लगे।
     राज़ अपने सब मत खोलो।
     समझदारी की चाबी तोलो।
हर साथी साथ निभाता नहीं।
हर रिश्ता दिल से जाता नहीं।
     समय पर सच खुद दिख जाएगा।
     भेद भी धीरे खुल जाएगा।
विश्वास बहुत अनमोल है।
पर परखना भी बड़ा बोल है।
     जो सच्चा है वही रहेगा।
     झूठ का पर्दा गिर ही जाएगा।
सच की राह कठिन जरूर है।
पर यही जीवन का नूर है।

104. ऊँचाई का सच

हर ऊँचाई को गिरने का डर होता है।
हर सफलता के पीछे संघर्ष खड़ा होता है।

जो ऊपर जाता है, संभलना भी सीखता है।
समय के साथ चलना भी सीखता है।

ऊँचाई पर अहंकार नहीं होना चाहिए।
मन में अंधकार नहीं होना चाहिए।

हौसले को हमेशा साथ रखना है।
सादगी को दिल में बाँध रखना है।

शिखर भी एक दिन थक जाता है।
मजबूत वही जो टिक जाता है।

सपनों को उड़ान देना है।
पर जड़ों को भी पहचानना है।

हर जीत परीक्षा लेकर आती है।
नई चुनौती भी साथ लाती है।

डर को मन से दूर भगाओ।
आगे बढ़ते कदम बढ़ाओ।

ऊँचाई वही जो संतुलन सिखाए।
जीवन को सच्चा अर्थ बताए।

संघर्ष ही पहचान बनाता है।
यही सफलता का गीत गाता है।

103. जीवन का पाठ

ये हकीकत है, बंधु सुन लो।
किताबों से सीखो तो नींद आती है।
ज़िंदगी अगर खुद सिखाने लगे।
तो रातें भी अक्सर जाग जाती हैं।

पन्नों पर लिखा सब आसान लगे।
सच का सफर थोड़ा कठिन लगे।
शब्दों में ज्ञान सिमट जाता है।
अनुभव मन को झकझोर जाता है।

कहानी पढ़कर मुस्कान आती है।
पर संघर्ष की आँच रुलाती है।
किताबें राह दिखा सकती हैं।
पर ज़िंदगी भी सब सिखा सकती है।

सपनों की कीमत समझाती है।
अपनों की असलियत दिखाती है।
सफलता का मतलब बताती है।
और हार से उठना सिखाती है।

ये जीवन का गहरा ज्ञान है।
अनुभव ही असली विज्ञान है।
किताबें साथी बन सकती हैं।
पर ज़िंदगी ही गुरु महान है।

102. अति का अंत

अति के बाद क्षति निश्चित है।
     चाहे तुम कितने भी दिग्गज हो।
शक्ति का अहंकार मिट जाता है।
     समय का चक्र भी घूम जाता है।
हर चीज़ की सीमा होती है।
     जीवन में भी रीति होती है।
जो सीमा पार कर जाता है।
     वो अंत में पछताता है।
अधिक बोलना भी भारी होता है।
     अधिक सोचना भी दुख देता है।
अति विश्वास भी चोट करता है।
     अति मोह भी मन तोड़ता है।
संतुलन ही जीवन की कुंजी है।
     यही सबसे बड़ी पूंजी है।
धीरे चलना भी समझदारी है।
     शांति में ही खुशहाली है।
अति का रास्ता अंधेरा लाता है।
     संयम ही आगे बढ़ाता है।
यही जीवन का सच्चा सार है।
     मध्यम मार्ग ही स्वीकार है।

101. आईने का सच

आईना जब भी उठाया करो।
पहले खुद को देखा करो।
फिर दुनिया को दिखाया करो।

     सच का दीप जलाया करो।
     चेहरे से ज्यादा मन पढ़ना।
     अंदर की आवाज़ भी सुनना।

झूठी हँसी को दूर रखना।
सादगी को साथ रखना।
आईना सिर्फ रूप नहीं दिखाता।

     भीतर का हाल भी बताता।
     दिल साफ़ हो तो चमक आए।
     सच की खुशबू भी फैल जाए।

दूसरों में दोष ढूँढना छोड़ो।
अपने अंदर भी झाँक के देखो।
हर खामी को सुधारते जाओ।

     जीवन को सुंदर बनाते जाओ।
     जो जैसा है, वैसा स्वीकारो।
     अहंकार का बोझ उतारो।

आईना जब सच दिखाएगा।
मन भी हल्का हो जाएगा।

100. सीमाओं का खेल

सबके उतने ही रहो जितने वो तुम्हारे हैं।
ज्यादा घुसोगे तो लोग कहते बेचारे हैं।

     अपनी हदें भी थोड़ी समझदार रखो।
     रिश्तों की प्लेट में संतुलन रखो।

कोई बहुत प्यार दिखाए, तो मुस्काओ।
पर दिल की चाबी जल्दी मत थमाओ।

     फोन करे तो दो मिनट बात कर लो।
     वरना लोग लंबी डिमांड धर लो।

सबके लिए दिल पूरा खोलना नहीं।
हर किसी को अपना बोलना नहीं।

     कुछ लोग चाय जैसे गर्म पसंद करते हैं।
     पर बाद में बिना शक्कर के ही चलते हैं।

जो जितना दे, उतना ही लो भाई।
फालतू इमोशन की मत करो कमाई।

     ज़्यादा अच्छे बनोगे तो फँस जाओगे।
     फिर सबके काम में बस लग जाओगे।

थोड़ी दूरी भी जरूरी होती है।
वरना रिश्तों की हालत बुरी होती है।

     सबके उतने ही रहो जितने वो तुम्हारे।
     खुश रहोगे, बचेंगे भी झगड़े सारे।

99. किराए के रिश्ते

कुछ रिश्ते किराए के मकान जैसे होते हैं।
उन्हें कितना भी सजा लो, अपने नहीं होते हैं।

दीवारों पर चाहत की रंगाई कर लो।
फिर भी दिल से कभी जुड़ नहीं होते हैं।

अपना समझकर भी पराया सा लगता है।
हर सपना आधा सा लगता है।

समय की धूल जब जम जाती है।
यादों की खुशबू भी कम हो जाती है।

किराए का घर पल भर का साथ देता है।
पर अपनापन कहाँ साथ रहता है।

जैसे हवा आती है और चली जाती है।
वैसे ही भावना भी टूट जाती है।

रिश्ते भी अगर शर्तों पर हों।
तो प्यार कहाँ फिर दिल में हों।

सच्चाई ही रिश्तों की पहचान है।
विश्वास ही जीवन की शान है।

जो अपना है, वही साथ निभाएगा।
मुश्किल में भी हाथ बढ़ाएगा।

किराए के रिश्ते बदल जाते हैं।
अपने रिश्ते ही रह जाते हैं।

98. हुनर और पहचान

गधों को सफलता मिल जाए कभी।
तो मत समझो हुनर है अभी।
हो सकता है खेल ही बदल गया।
या मौका किसी और से निकल गया।

हर जीत सच की गवाही नहीं।
हर चमक असली स्याही नहीं।
कभी भाग्य भी साथ निभाता है।
अनजाना रास्ता जीत दिलाता है।

हो सकता है घोड़ा रेस में न दौड़ा हो।
अपनी ताकत को उसने न जोड़ा हो।
मौका मिले तो सब दिखता है।
हुनर समय पर ही खिलता है।

सफलता केवल शोर नहीं होती।
सिर्फ भाग्य की डोर नहीं होती।
मेहनत की आग जो भीतर जलती है।
वही असली पहचान बनती है।

दिखावे की दुनिया से दूर रहो।
अपने कर्मों पर ही गर्व करो।
सच्ची जीत धीरे आती है।
पर हमेशा साथ निभाती है।

97. हौसले की रोशनी

अगर कभी बुरा दिन आ जाए।
तो मन को थोड़ा समझा जाए।
याद रखना दिन बुरा होता है।
जिंदगी नहीं बुरा सोता है।

तूफान भी एक दिन थम जाएगा।
अंधेरा भी खुद मिट जाएगा।
हिम्मत का दीप जलाए रखना।
दिल में विश्वास बसाए रखना।

मुश्किलें रास्ता रोक नहीं सकतीं।
सपनों की उड़ान थाम नहीं सकतीं।
हार भी एक सबक सिखाती है।
नई उम्मीदें फिर जगाती है।

समय बदलता रहता हर पल।
संघर्ष भी देगा तुझको बल।
अपने कदम कभी मत रोकना।
आगे ही आगे बस चलना।

याद रख दिन बुरा है जिंदगी नहीं।
हौसले से बड़ी कोई बंदगी नहीं।
खुद पर भरोसा बनाए रखना।
जीवन की लौ जलाए रखना।

96. बुजुर्गों की सीख

बुजुर्ग कहते हैं यह बात पुरानी।
फसल रंग बदले तो काट दो जानी।
     मेहनत का फल समय पर लेना।
     उपज को व्यर्थ नहीं रहने देना।
पर लोगों का रंग जब बदल जाए।
रिश्तों की डोर अगर टूट जाए।
     तो समझदारी से दूरी रखना।
     अपने मन को साफ़ रखना।
फसल में भी मौसम का खेल है।
जीवन भी अनुभवों का मेल है।
     जो पक जाए, वही काम का है।
     समय पर करना ही नाम का है।
लोगों के रंग पहचानना सीखो।
सच और झूठ को परखना सीखो।
     हर किसी पर भरोसा नहीं करना।
     अपने सम्मान को कम नहीं करना।
बुजुर्गों की बातें काम की होती हैं।
जीवन की राहें आसान होती हैं।
     समय सिखाता है सबक अनोखा।
     समझदार बनता हर एक मौका।

95. वक्त का सच

वक्त बर्बाद ना करें दिखावे में।
वरना जिंदगी गुजर जाएगी पछतावे में।
झूठी शान का बोझ मत उठाओ।
सच की राह खुद ही अपनाओ।

     दिखावे की दुनिया बहुत रंगीन लगे।
     पर अंदर से अक्सर खाली मिले।
     अपनी हद में सादगी रखो।
     दिल की आवाज़ को साथ रखो।

समय किसी का इंतज़ार नहीं करता।
बीता पल फिर लौटकर नहीं आता।
जो आज है, उसे जी लेना सीखो।
खुशियों के बीज खुद ही सींचो।

     बाहरी चमक से धोखा मत खाना।
     अंदर की रोशनी को पहचानना।
     अपनी मेहनत पर भरोसा रखना।
     सपनों को मन में संजोए रखना।

दिखावा अंत में खाली करेगा।
सच का रास्ता ही साथ चलेगा।
जो सच्चा है, वही जीत पाएगा।
वक्त का सच सबको समझ आएगा।

94. नियत और सच्चाई

मेरे जूते भी तेरी नियत से ज्यादा साफ हैं।
यह बात कड़वी है, पर जीवन का सच्चा माप है।
दिखावे की चमक ज्यादा देर नहीं टिकती।
झूठ की महक भी दिल तक नहीं पहुँचती।

चेहरे पर मुस्कान, अंदर छल न रखो।
अपनी सोच में कभी मल न रखो।
सच्चाई का रास्ता थोड़ा कठिन होगा।
पर अंत में वही सबसे सुखद होगा।

दूसरों को गिराने की आदत छोड़ो।
अपने भीतर की नीयत को जोड़ो।
किसी की कमजोरी का मज़ाक न उड़ाओ।
इंसानियत को अपने दिल में बसाओ।

शब्दों में मधुरता होना जरूरी है।
व्यवहार में सादगी भी पूरी है।
अहंकार का बोझ लेकर मत चलो।
समय के आगे सिर झुका कर चलो।

जो सच्चा है, वही आगे जाएगा।
धोखा देने वाला खुद पछताएगा।
मेहनत ही सबसे बड़ी पहचान है।
साफ दिल ही सबसे महान है।

93. संयम की शक्ति

जिसने खुद को भीतर समेटा है।
वो किसी को बिखरने नहीं देता।
जो अपने दर्द को चुपचाप सहता है।
वो दूसरों का हाथ नहीं छोड़ता।

संयम ही सबसे बड़ी ताकत है।
शांत मन की अलग ही राहत है।
जो अपने मन को जीत लेता है।
वही जीवन की राह चुन लेता है।

क्रोध को जिसने दूर रखा है।
समझ को दिल में भर रखा है।
वो मुश्किल में भी मुस्कुराता है।
हर तूफान को पीछे हटाता है।

अपने घाव खुद ही भरना है।
आगे बढ़ते रहना ही धर्म है।
हार भी एक सीख सिखाती है।
नई उम्मीदें फिर जगाती है।

जो खुद को संभालना जानता है।
वो दुनिया को भी पहचानता है।
संयम में ही विजय छुपी है।
यही जीवन की असली शक्ति है।

92.  संबंध की असली पहचान

संबंध का अर्थ है सम्मान देना।
पीठ पीछे भी मान बनाए रखना।

सच्चाई रिश्तों की नींव होती है।
विश्वास ही जीवन की धुन होती है।

मुँह पर मीठा, पीछे जहर नहीं।
रिश्तों में कोई कहर नहीं।

जो दिल में है, वही ज़ुबान पर हो।
हर रिश्ता सच्चे ईमान पर हो।

अपनों की इज्जत छुपकर भी हो।
भावनाओं की हिफ़ाज़त सबमें हो।

बातों में सादगी बनी रहे।
विश्वास की रोशनी जली रहे।

नाम खराब करने की चाह नहीं।
रिश्तों में कोई आह नहीं।

संबंधों में दूरी भी जरूरी है।
पर सम्मान की राह भी पूरी है।

पीठ पीछे भी आदर रखना।
यही संबंधों का गहना रखना।

यही जीवन का सच्चा सार है।
सम्मान ही सबसे बड़ा प्यार है।