23. स्वयं को पहचान

क्यों रोक रखा है तूने खुद को अपने ही भीतर कहीं,
जब जीवन की राहें तेरे लिए खुली हुई हैं वहीं।
क्यों डर के साए में अपने सपनों को खोता जाता है,
जब किस्मत का सूरज तेरे साथ ही चलता जाता है।


अस्तित्व यही चाहता है कि तू मुस्कुराता रहे,
आँखों में चमक और दिल में विश्वास सजाता रहे।
जीवन किसी कैद की तरह नहीं होता है कभी,
यह तो एक पवित्र प्रकाश का सुंदर मार्ग है सभी।


अपने कदमों को अब आगे बढ़ाना सीख ले,
अपनी सोच को भी ऊँची उड़ान देना सीख ले।
दुनिया में जो कुछ भी तू खोजता फिरता है,
पहले अपने भीतर ही उसे पहचानना सीख ले।


डर को अपने मन से धीरे-धीरे हटाते चल,
सपनों की राह पर साहस को साथ ले चलते चल।
हर असफलता भी एक नया सबक सिखाती है,
हर गिरना ही उठने की शक्ति जगाती है।


तू खुद अपनी मंज़िल का निर्माण कर सकता है,
अपने कर्मों से नया इतिहास रच सकता है।
किसी और की राह पर चलना जरूरी नहीं,
अपनी पहचान ही जीवन की असली कहानी है।


इसलिए खुद पर भरोसा करना कभी मत छोड़ना,
सपनों की डोर को मजबूती से थामे रखना।
जो ढूँढ रहा है तू बाहर दुनिया के मेले में,
उसे पहले अपने अंदर ही खोजते रहना।

22. जीवन का संदेश

ब्रह्मांड की धड़कनों में एक मधुर संदेश छिपा रहता है,
“खुश रहो, मुस्कुराओ, जीवन बहुत अनमोल हुआ करता है।”
पर मनुष्य अपनी ही चिंताओं में उलझा रह जाता है,
अपने ही बनाए हुए बंधनों से लड़ता रह जाता है।


खुद के भीतर ही वह अंधेरों की दीवार खड़ी कर लेता है,
डर और संशय के साए में उम्मीद को खो देता है।
दुनिया को अपने दुखों का कारण बताता रहता है,
पर सत्य है कि मन ही स्वयं से युद्ध करता रहता है।


यदि मन के भीतर थोड़ी शांति को जगा लिया जाए,
तो जीवन का हर पल सुंदर गीत बनकर छा जाए।
छोटी-छोटी खुशियों में आनंद खोजते जाना,
अपने हृदय में प्रेम का दीप जलाते जाना।


चिंताओं का बोझ अगर मन पर ज्यादा बढ़ जाए,
तो उसे मुस्कान के हल्के स्पर्श से हटाया जाए।
जीवन कठिन नहीं, बस सोच को बदलना होता है,
हर अंधकार के बाद नया सवेरा होना होता है।


ब्रह्मांड की लय में एक सुंदर संदेश बहता है,
खुश रहने वाला ही सच्चा जीवन जीता रहता है।
संकट चाहे कितने भी रास्ते में क्यों न आएँ,
धैर्य और विश्वास मन की शक्ति बन जाएँ।


अगर भीतर शांति का छोटा दीप जलाते रहेंगे,
तो जीवन को भी एक सुंदर संगीत बनाते रहेंगे।
इसलिए हर दिन मुस्कान को अपना साथी बनाओ,
जीवन को प्रेम और शांति से सजाते जाओ।

21. उदासी और जीवन की रोशनी

उदासी के सन्नाटों में दिल धीरे-धीरे घबराता है,
हर धड़कन का अर्थ कहीं खोया-सा नजर आता है।
जब जीवन की राहों पर अंधकार घिरने लगता है,
मौत का विचार चुपके से मन को छूने लगता है।


चेहरे की मुस्कानें भी धीरे-धीरे खोने लगती हैं,
खुशियों की परछाइयाँ कहीं दूर जाने लगती हैं।
तन्हाई जब मन के ऊपर चादर बनकर छा जाती है,
उदासी के क्षणों में मौत की याद आ जाती है।


कदम भी रुक जाते हैं और साँसें भारी होने लगती हैं,
आँखों में भीगी-भीगी सी बातें बसने लगती हैं।
टूटे हुए सपनों की आवाज़ जब लौटकर आती है,
मन की शक्ति कहीं दूर छुपकर सो जाती है।


पर हर रात के बाद एक नया सवेरा भी आता है,
हर टूटे दिल में जीवन का दीप फिर जल जाता है।
मौत का विचार कमजोर क्षणों में साथ निभाता है,
पर जीवन का साथ पकड़ो तो सब बदल जाता है।


उदासी की गहराई भी एक दिन कम हो जाती है,
टूटी हुई आशा फिर से साँसें भर पाती है।
मौत की याद आए तो मन को डरने मत देना,
जीवन की रोशनी को कभी भी कम होने मत देना।


अंधकार चाहे जितना भी गहरा क्यों न हो जाए,
सूरज का उजाला फिर एक दिन लौटकर आए।
इसलिए जीवन को हमेशा आगे बढ़ाते रहना,
हर दुख के बाद खुशी को अपनाते रहना।

20. तुलना और ईर्ष्या से मुक्ति

तुलना की नजर जब मन के भीतर छा जाती है,
अंदर की रोशनी धीरे-धीरे बुझती जाती है।
दूसरों की ऊँचाइयों को बस देखते ही रह जाते हैं,
अपनी ही पहचान को कहीं पीछे छोड़ आते हैं।


ईर्ष्या का बीज कोई और बाहर नहीं बोता है,
हम ही अपने हाथों उसे मन में सींचते होता है।
दूसरों की खुशियों में भी कमी खोजते रहते हैं,
अपने हृदय की धरती को बंजर करते रहते हैं।


तुलना का खेल बहुत ही ज्यादा खतरनाक होता है,
यह जीत से पहले ही हार का स्वाद चखवाता है।
जो खुद को दूसरों के तराजू में तौलता रहता है,
वह धीरे-धीरे अपना मूल्य खोता जाता है।


ईर्ष्या मन की शक्ति को कमजोर बना देती है,
व्यक्ति की उड़ान को सीमित कर देती है।
दूसरों की चमक देखकर दुखी नहीं होना चाहिए,
अपनी ही रोशनी पर भरोसा करना चाहिए।


हर इंसान का जीवन और सफर अलग होता है,
हर मंज़िल का रास्ता भी अलग-अलग होता है।
तुलना से न कोई आगे बढ़ पाया है कभी,
न तुलना से किसी को सच्ची खुशी मिली है।


अगर जीतना है तो खुद से जीतते जाना होगा,
अगर बढ़ना है तो खुद को ही सुधारना होगा।
ईर्ष्या के अंधकार में जीवन मत बिताना,
अपनी खूबियों की रोशनी में चमकते जाना।


तुलना छोड़ देने से मन विशाल बन जाता है,
ईर्ष्या छोड़ देने से इंसान महान बन जाता है।
जो अपनी राह पर सच्चाई से चलता जाता है,
वही जीवन में सबसे ऊँचा स्थान पाता है।

19. अस्तित्व की पुकार

अस्तित्व मधुर स्वर में मन को पुकारता रहता है,
“जागो मानव, खुशियों को जीवन में चुनते रहना।”


आकाश, पवन और सितारों की चमक साथ तुम्हारे है,
हर पल, हर क्षण प्रकृति का आशीर्वाद तुम्हारे है।


पर मन ही खुद अपने सामने दीवार खड़ी कर लेता है,
डर के साए में उम्मीद का दीप भी बुझा देता है।


हम दुनिया को अपने दुखों का कारण बताने लगते हैं,
पर सच यही है कि मन ही सबसे बड़ा शत्रु बन जाते हैं।


हर नया सवेरा जीवन में अवसर लेकर आता है,
टूटे हुए सपनों को फिर से जोड़कर दिखलाता है।


जो कुछ बिखर गया है, उसे फिर सँवार सकता है,
जीवन का नया अध्याय फिर से रच सकता है।


जीवन का सच्चा संगीत खुशी से ही शुरू होता है,
जब दिल में प्रेम और उमंग का दीप जलता होता है।


अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न छा जाए,
सूरज फिर भी हर सुबह नया उजाला लाए।


अपनी सोच को सकारात्मक दिशा में मोड़ते जाना,
छोटी-छोटी खुशियों में जीवन को ढालते जाना।


मन के भीतर बसे डर को धीरे-धीरे हराना,
साहस और विश्वास को अपना साथी बनाना।


याद रखो जीवन का सार सरलता में छुपा रहता है,
खुश रहने का रहस्य अपने भीतर ही बसता है।


हर दिन नया अवसर है, इसे स्वीकार करते चलो,
अस्तित्व की पुकार को मन से साकार करते चलो।

18. क्षमा का पुष्प

क्षमा एक कोमल फूल है, जिसमें प्रेम की छाया रहती है,
शीतल-सी उसकी महक हर मन को अपना बना लेती है।
दुनिया चाहे उसे रौंद दे या ठुकराकर दूर करे,
फिर भी उसकी सुगंध समय के साथ चुपचाप बिखरे।


दुःख की धूल भी जिस फूल पर धीरे से गिर जाती है,
वह और भी ज्यादा सुंदर और सुगंधित बन जाती है।
जीवन से जिसको चोट मिले, वह और दिव्य हो जाता है,
पीड़ा सहकर भी मन का सौंदर्य बढ़ता जाता है।


क्रोध भीतर ही भीतर जलकर अंधकार फैलाता है,
द्वेष का साया धीरे-धीरे जीवन को भर जाता है।
पर क्षमा का छोटा-सा दीप यदि मन में जल जाए,
हर पीड़ा, हर अंधकार उसी पल दूर हो जाए।


जिस मन में क्षमा की निर्मल धारा बहती रहती है,
वहाँ कलुष और द्वेष की छाया कभी नहीं ठहरती है।
जहाँ प्रेम की उजली ज्योति हृदय में जग जाती है,
वहाँ अंधियारी रात भी धीरे-धीरे ढल जाती है।


जो मन क्षमा को सच्चे भाव से अपना लेता है,
वह स्वयं ही प्रकाश का सुंदर रूप बन जाता है।
कुचले हुए फूलों जैसी उसकी सुगंध फैलती जाती है,
दूर-दूर तक प्रेम और शांति का संदेश पहुँचाती है।


जीवन का सबसे सुंदर सत्य प्रेम का प्रवाह है,
क्षमा ही संसार में सबसे मधुर और पावन चाह है।
क्षमा वह सुगंध है जो मन को निर्मल कर देती है,
मानवता के मार्ग पर नई रोशनी भर देती है।

17. धैर्य का दीप

जब दुःख के काले बादल जीवन में घिर आते हैं,
और मन के आँगन पर गहरी उदासी छा जाते हैं।
तब साहस का एक दीप हृदय में जलाए रखना,
किसी भी हाल में स्वयं को हारने न देना।


जब शोक की लहरें उठकर मन को घेरने लगें,
और उम्मीद की नाव भी डगमगाने लगें।
तब धैर्य का सहारा लेकर आगे बढ़ते जाना,
जीवन की कठिन धाराओं को पार करते जाना।


कठिन समय ही जीवन का सच्चा शिक्षक होता है,
पथरीली राहों पर चलना भी सिखाता होता है।
मुश्किलों के बीच भी कदम आगे बढ़ाते रहना,
हर हाल में अपने संकल्प को निभाते रहना।


कर्तव्य के मार्ग पर सदा अडिग होकर चलना,
चाहे कितनी भी आँधियाँ क्यों न साथ में पलना।
विश्वास की मजबूत डोर को थामे रखना,
धीरे-धीरे आगे ही आगे बढ़ते रहना।


जो धैर्य और परिश्रम के साथ चलता जाता है,
वह अपने जीवन का सच्चा लक्ष्य पा जाता है।
संकट चाहे कितने भी चारों ओर क्यों न आएँ,
दृढ़ मन से हर बाधा को पार कर जाएँ।


इस जीवन का एक ही सच्चा नियम अपनाना,
संकट से कभी भी मन को न घबराना।
धैर्य, परिश्रम और कर्तव्य के पथ पर चलना,
स्वयं अपना सुंदर भविष्य स्वयं ही गढ़ना।

16. खामोश त्याग की रोटी

जब दीपक की लौ भी थककर धीमी पड़ जाती है,
और सड़कों की खामोशी रात में उतर आती है।
तब वह भारी कदमों से दरवाज़ा खोलता है,
दिनभर की थकान को चुपचाप साथ टटोलता है।


दिन भर उसने सूरज से अपने हिस्से की जंग लड़ी,
पसीने और खामोशी के संग हर मुश्किल से लड़ाई करी।
सपनों को अपनी जेब में मोड़कर रख लेता है,
जो सपने थे भी नहीं, फिर भी उनको सँभाल लेता है।


घर तब तक उसके आने तक सो चुका होता है,
परदे गिर जाते हैं, सन्नाटा ही रह जाता है।
मेज़ पर रखी ठंडी रोटियाँ उसका इंतज़ार करती हैं,
बिना किसी शिकायत के चुपचाप खड़ी रहती हैं।


वे रोटियाँ सिर्फ आटे और आग से नहीं बनी होतीं,
उनमें उसके पसीने और दर्द की कहानी छुपी होती।
हर कौर में दबा हुआ संघर्ष का एक साया रहता है,
होंठों पर उसकी मजबूरी का मौन ठहरा रहता है।


दिनभर की बात कोई उससे पूछने वाला नहीं होता,
उसके दिल का दर्द भी किसी से कहा नहीं जाता।
दिल अब खामोशी की भाषा को समझने लगा है,
जैसे मिट्टी के नीचे कोई बीज सोने लगा है।


पास के कमरे में बच्चे मीठे सपने बुनते रहते हैं,
उनकी हँसी के पीछे किसी के त्याग छुपे रहते हैं।
थकी आँखों और अधूरी नींदों की कीमत किसने जानी,
उनकी खुशियाँ खरीदी गईं किसी की कुर्बानी से मानी।


वह ठंडी रोटियों से कभी शिकायत नहीं करता है,
त्याग की भाषा को अब वह भलीभाँति समझता है।
हर दिन जीवन उसे सहने का पाठ सिखाता है,
कि असली गर्माहट मन के भीतर से ही आता है।


दुनिया तालियाँ उन्हीं के लिए बजाया करती है,
जो ऊँचे स्वर में अपनी पहचान दिखाया करती है।
पर ईश्वर हर खामोश दर्द और त्याग को जानता है,
हर निभाए हुए वादे का मूल्य वही पहचानता है।


रोटियाँ ठंडी ही सही, भूख भी कुछ पल ठहर जाए,
प्रेम की भाषा हर पीड़ा से आगे निकल जाए।
शायद किसी दिन चूल्हा फिर उसके लिए भी जलेगा,
किसी की आँखों में इंतज़ार का सूरज भी खिलेगा।


तब तक वह शांति से वही रोटी खाता रहेगा,
जिसमें किसी प्रेम का मौन आशीर्वाद समाया रहेगा।

15. धैर्य और कर्तव्य का पथ

दुःख और शोक जब भी जीवन में आकर घेर लें,
धैर्य का दीप हृदय के आँगन में सदा ही जला रखें।


आँधियाँ आएँ या फिर तूफानों का शोर उठे,
मन की लौ को किसी भी परिस्थिति में बुझने न दें।


जीवन की राहें कभी भी सरल नहीं हुआ करती हैं,
कदम-कदम पर कठिन परीक्षाएँ खड़ी रहा करती हैं।


जो भय और संशय में रुककर ठहर जाया करते हैं,
वे अपने ही लक्ष्य के पथ से पीछे हट जाया करते हैं।


सहनशीलता की डाली को मन का सहारा बना लो,
क्षणिक पीड़ा और हार को जीवन का अंत न मानो।


जिस मिट्टी में आँसुओं की बूंदें गिर जाया करती हैं,
उसी धरती से फूलों की नई खुशबू आया करती है।


कर्तव्य का मार्ग ही जीवन का सच्चा तीर्थ कहलाता है,
जहाँ हर यात्री अपने तप से स्वयं को निखरता पाता है।


स्वार्थ का त्याग कर जो इस राह पर चलता जाता है,
वही अंत में सम्मान और सफलता भी पाता है।


न अपमान से मन कभी भी डगमगाने देना,
न प्रशंसा के अहंकार को हृदय में आने देना।


जो सुख-दुःख में समभाव का दीप जलाए रखता है,
वही जीवन की लड़ाई में सच्चा विजयी बनता है।


श्रम जब थकान का भारी बोझ बनकर आने लगे,
और आशा की किरण भी धुंधली सी दिखने लगे।


तब याद रखना हर प्रयास रंग अवश्य लाएगा,
समय के साथ कर्म का फल भी मिल जाएगा।


जो गिरकर भी फिर उठने का साहस रखता है,
दुःख में भी धर्म और सत्य का पथ न छोड़ता है।


सफलता केवल शिखर नहीं, सतत चलने का नाम है,
सत्य के संग हर दिन लड़ना ही जीवन का काम है।


दुःख शोक जब भी जीवन में आकर सताने लगें,
धैर्य और कर्तव्य के पथ पर दृढ़ता से चलते रहें।


सफलता निश्चित मिलेगी, यह विश्वास सदा रखना,
कर्म और धैर्य से जीवन का सम्मान सदा रखना।

14. धैर्य का दीप

दुःख और शोक जब भी जीवन में आ जाएँ,
धैर्य का दीप मन के आँगन में जलाए रखें।
आँधियों और तूफानों से कभी न घबराएँ,
मन की लौ को किसी भी हाल में बुझने न दें।


जीवन की राहें सरल नहीं, काँटों से भरी होती हैं,
हर कदम पर यहाँ कठिन परीक्षाएँ खड़ी होती हैं।
जो भय और संशय में रुककर ठहर जाते हैं,
वे अपने ही लक्ष्य के रास्ते से गिर जाते हैं।


सहनशीलता की शाख पकड़कर आगे बढ़ते जाना सीखो,
क्षणिक पीड़ा और हार को जीवन न मानना सीखो।
जिस मिट्टी में आँसू गिरते हैं, फूल वहीं खिलते हैं,
अंधेरी रातों के बाद नए सवेरा भी मिलते हैं।


कर्तव्य का मार्ग ही जीवन का सच्चा तीर्थ कहलाता है,
जहाँ हर यात्री अपने तप और कर्म से निखर जाता है।
स्वार्थ को त्यागकर जो राह पर चलता जाता है,
वही अंत में सम्मान और सफलता पाता है।


न अपमान मन को कभी भी कमजोर करने पाए,
न प्रशंसा का अहंकार दिल में घर करने पाए।
जो सुख-दुःख में समभाव का दीप जलाए रखता है,
वही जीवन के संघर्षों में सच्चा विजयी बनता है।


जब श्रम थकान का भारी बोझ बनकर आने लगे,
और आशा की किरण भी धुंधली सी दिखने लगे।
तब याद रखना हर प्रयास रंग अवश्य लाएगा,
समय के साथ कर्म का फल भी मिल ही जाएगा।


जो गिरकर भी फिर से उठ खड़ा होने का साहस रखे,
दुःख में भी अपने धर्म और सत्य का पथ न छोड़े।
उससे बड़ा वीर जग में और कोई नहीं होता,
धैर्य और कर्म ही मनुष्य का सच्चा गौरव

13. बदलते लोगों से दूरी ही भली


तकलीफ़ें तो जैसे वाई-फाई की तरह होती हैं,
आज जुड़ीं, कल अपने आप ही खोती हैं।


दो-चार रिस्टार्ट में ग़म भी पुराना हो जाता है,
ज़िंदगी का सफ़र फिर से सुहाना हो जाता है।


मगर जो जानबूझकर दिल पर चोट लगाता है,
वो पॉप-अप ऐड की तरह पीछा नहीं छोड़ पाता है।


क्रॉस का बटन दबाओ तो भी लौटकर आता है,
“अभी कहाँ गए? मैं फिर आऊँ?” यही दोहराता है।


कुछ लोग मौसम से भी तेज़ बदल जाते हैं,
सुबह कुछ और, दोपहर कुछ और रंग दिखाते हैं।


पूछो तो कहते हैं— “मैं ऐसा ही स्वभाव रखता हूँ”,
जैसे बदलना उनकी कोई खास पहचान रखता हूँ।


ऐसे इंसान पर भरोसा करना मुश्किल काम है,
जैसे चाय में नमक डालना, हर घूँट में गुमनाम है।


हर घूँट पर दिल यही सवाल दोहराएगा,
क्या ये मेरी गलती थी या वक्त ही सताएगा।


जिनकी फितरत ही बदलने की राह चुनती है,
उनकी दोस्ती भी ज्यादा देर कहाँ टिकती है।


न उनके वादे लंबे चलते, न रिश्ते मजबूत रहते हैं,
ऐसे लोग बस अपने ही रंग में खोए रहते हैं।


समय बदलता है, यह सच हर किसी ने जाना है,
पर इंसान का बदलना भी एक सीख भरा बहाना है।


जो हर पल अपना रंग बदले, उस पर भरोसा न करो,
ऐसे लोगों से जीवन में दूरी ही बेहतर भरो।

12. दर्द की स्याही से लिखी कहानी

उन्होंने सिर्फ ऊँचे मकानों की चमक देखी है,
दीवारों के पीछे छुपी बेचैनी कभी नहीं देखी है।


महलों की खामोश रातों का अँधेरा समझा नहीं,
रौशनी में बंद उम्मीदों की आहट सुनी नहीं।


हमने हर सपने को टूटकर बिखरते देखा है,
आँखों के समंदर में खामोशी को बहते देखा है।


चाहत के शहर में जलते हुए अरमान भी जाने हैं,
दिल के कोनों में छुपे दर्द के अफ़साने पहचाने हैं।


वो खुशियों की नरम धूप में चलते रहे सदा,
आसान रास्तों पर ही बढ़ते रहे सदा।


हमने काँटों भरी राहों में मुस्कुराना सीखा है,
गिरकर भी हर बार फिर से उठ जाना सीखा है।


वो हँसी को सिर्फ होंठों की सजावट समझते रहे,
हम आँखों की नमी में भी कहानी पढ़ते रहे।


राज़-ए-दिल हमने अश्कों की ज़बान में कह दिया,
हर ज़ख़्म को ख़ामोशी का पैग़ाम दे दिया।


उन्होंने ज़िंदगी को बस आसान सा खेल समझा,
हमने हर दर्द को भी अपना मेल समझा।


“राजीव” ने शब्दों में अपने दर्द को ढाल दिया,
शायरी के आईने में सच्चाई को संभाल दिया।


दिल की दुनिया को उन्होंने कभी महसूस नहीं किया,
अल्फ़ाज़ों में छिपे सच को भी देखा नहीं किया।

11. पुरुष क्यों खुश रहते हैं

पुरुषों की खुशी का अलग ही अंदाज़ होता है
साधारण जीवन ही उनका राज होता है
एक ही नाम के साथ जीवन बिताते हैं
और अपने रास्ते खुद चुनते जाते हैं


गर्भधारण का दर्द उन्हें सहना नहीं पड़ता
जटिलताओं का बोझ भी उन्हें लेना नहीं पड़ता
मेकैनिक की बातों में उलझते नहीं हैं
धोखे के डर में ज्यादा सोचते नहीं हैं


झुर्रियाँ उनके व्यक्तित्व को निखारती हैं
सफेद बाल भी उन्हें सुंदरता देती हैं
नए जूते उन्हें चोट नहीं पहुँचाते
आसान जिंदगी में ही खुश हो जाते


फोन की बातें ज्यादा लंबी नहीं चलती
तीस सेकंड में कहानी पूरी हो जाती
सफर के लिए एक बैग काफी होता है
आधा खाली रखना भी सही लगता है


किसी की मदद के बिना ढक्कन खोल लेते हैं
बोतल और जार आसानी से खोल लेते हैं
पार्टी में एक जैसे कपड़े से भी नहीं डरते
बल्कि नए दोस्त बनाने से नहीं कतराते


एक ही सूट बार-बार पहन सकते हैं
शादी में भी वही स्टाइल रख सकते हैं
सार्वजनिक जगहों पर केला खा सकते हैं
बिना किसी शर्म के जीवन जी सकते हैं


टीवी के सामने घंटों चुप बैठ सकते हैं
दोस्त के साथ भी कम बात कर सकते हैं
गुस्से का अर्थ ज्यादा नहीं समझते
मन की उलझनें जल्दी नहीं पकड़ते


अंडरवियर भी सस्ता ही चल जाता है
छह का पैक जीवन भर काम आ जाता है
तीन जोड़ी जूते सालों तक चलते हैं
सादगी में ही सपने पलते हैं


एक ही हेयरस्टाइल वर्षों तक रहता है
मन चाहे तो सिर भी मुंडवा लेता है
खिलौनों से खेलना नहीं छोड़ते
बचपन को दिल से जोड़ते रहते


स्विमिंग ट्रंक पहनने में नहीं सोचते
पेट निकला है या नहीं, नहीं जाँचते
जिंदगी को जैसे है वैसे ही अपनाते
हर हाल में मुस्कुराना जानते


वजन बढ़ जाए तो ज्यादा नहीं घबराते
पाँच किलो क्या, फर्क नहीं पाते
पैसा हो तो ध्यान सबका मिल जाता

पुरुष का जीवन ऐसे ही चल जाता।

10. ईश्वर पर भरोसा

भगवान पर विश्वास हमेशा सच्चा रखना
मन में डर का अंधेरा कभी न रखना
उस बच्चे की तरह भरोसा करना सीखो
जो सच्चाई को अपने दिल में रखो


     जिसको हवा में उछालो वह हँसता रहता है
     डर उसके मन में कहीं नहीं बसता रहता है
     वह जानता है आप उसे गिरने नहीं दोगे
     अपने हाथों से संभालकर ही लोगे


इसी तरह भगवान पर भरोसा करना
जीवन की हर चिंता को दूर रखना
ईश्वर के प्रेम में मन को बसाओ
हर कठिन समय में धैर्य अपनाओ


     कभी भी विश्वास को कमजोर मत होने देना
     डर के अंधकार में खुद को खोने मत देना
     भगवान हमेशा साथ निभाता है
     अदृश्य रूप से राह दिखाता है


श्रद्धा और आस्था मन में बसाए रखना
सच्चे विश्वास का दीप जलाए रखना।

9. मौका और धोखा

ज़िंदगी में मौका देने वाले भी मिलेंगे
और धोखा देने वाले भी मिलेंगे
जो मौका दे, उसे धोखा कभी मत देना
जो धोखा दे, उसे मौका कभी मत देना


     विश्वास की डोर को संभालकर रखना
     हर रिश्ते को प्यार से ही गढ़ना
     अच्छे लोगों की कदर करना सीखो
     दिल में सच्चाई का सफर चुनो


मौका देना इंसानियत की पहचान होती है
पर धोखा सहना मन की पीड़ा बन जाती है
जो भरोसा करे उसका सम्मान करना
सच्चाई की राह पर कदम बढ़ाना


     हर किसी पर आँख बंद करके भरोसा नहीं
     पर रिश्तों से अपना मन दूर भी नहीं
     समझदारी ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है
     यही इंसान की असली संपत्ति है


भलाई का रास्ता हमेशा अपनाते रहना
संतुलित सोच से जीवन सजाते रहना।

8. इच्छाओं का सत्य

इच्छाएँ और आवश्यकताएँ कभी पूरी नहीं होती
मन की प्यास भी आसानी से शांत नहीं होती
नींद भी जीवन में अधूरी सी रह जाती है
सपनों की दुनिया कहीं दूर चली जाती है


     जो जितनी सुविधा में जीवन बिताता है
     उतनी ही दुविधाओं में खुद को पाता है
     सुख और दुख का खेल चलता ही रहता है
     मनुष्य अपने भ्रम में उलझता ही रहता है


इच्छाओं का अंत कभी दिखाई नहीं देता
लालच का बीज मन से आसानी नहीं मिटता
संतोष ही जीवन का सबसे बड़ा धन है
यही सच्चे सुख का अमृत वचन है


     जरूरतों को सीमित करना सीखते जाओ
     अपने मन को शांत रखना अपनाते जाओ
     साधारण जीवन ही सुंदरता लाता है
     यही रास्ता खुशियों तक ले जाता है


जो संतोष में अपना जीवन बिताता है
वही सच्चा आनंद हर दिन पाता है।

7. असली पहचान

आपकी पहचान अपनों के रिश्तों से होती है
सिर्फ बड़े मकान और धन-दौलत से नहीं होती है
व्यक्तित्व की पहचान विनम्रता से बनती है
अभिमान की राह जीवन को अंधकार देती है


     अपनों के दिल में जगह बनाते चलो
     मीठे शब्दों से रिश्तों को सजाते चलो
     अहंकार को कभी मन में मत बसाना
     सादगी को अपनी ताकत बनाना


मकान बड़े होने से सम्मान नहीं मिलता
दिल बड़ा हो तो जीवन आसान बनता
जो दूसरों का सम्मान करना जानते हैं
वही सच्चे इंसान कहलाते हैं


     विनम्रता ही सबसे सुंदर आभूषण है
     यही जीवन का सच्चा प्रदूषण रहित भूषण है
     अपने स्वभाव को हमेशा सरल रखना
     सच्चाई की राह पर कदम बढ़ाते रखना


अभिमान इंसान को नीचे गिरा देता है
और विनम्र स्वभाव ऊँचा उठा देता है
अच्छे कर्मों से पहचान बनती है
यही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी होती है।

6. स्वभाव का संतुलन

प्रतिभा ईश्वर का दिया हुआ उपहार होती है
नत मस्तक रहना ही सच्ची पहचान होती है
ख्याति समाज के सम्मान से मिलती है
आभार व्यक्त करना ही महानता कहती है


     ज्ञान और योग्यता पर गर्व कभी मत करना
     अच्छे कर्मों से जीवन को सजाते रहना
     सफलता जब मिले तो विनम्र बने रहना
     अपने मन को अहंकार से दूर ही रखना


मनोवृत्ति और घमंड स्वयं से ही आते हैं
धीरे-धीरे इंसान को अंधकार में ले जाते हैं
अपनी सोच को हमेशा पवित्र बनाए रखना
सच्चाई की राह पर कदम बढ़ाए रखना


     जीवन में संतुलन सबसे जरूरी होता है
     विनम्र स्वभाव ही सबसे सुंदर होता है
     दूसरों का सम्मान करना सीखते जाना
     प्रेम और सेवा का दीप जलाते जाना


प्रतिभा मिले तो ईश्वर का धन्यवाद करना
ख्याति मिले तो समाज का आदर करना।

5. जीवन की सुंदरता

जीवन को हर दिन नया बनाते चलो
अच्छे विचारों की रोशनी फैलाते चलो
दिल में किसी के लिए नफरत न पालो
प्रेम और करुणा का दीपक जलाते चलो


     सपनों को अपनी आँखों में बसाए रखो
     मेहनत की राह पर कदम बढ़ाए रखो
     हार से कभी डरकर पीछे मत हटना
     सच्चाई का साथ हमेशा निभाए रखो


छोटी-छोटी खुशियों को पहचानो
हर रिश्ते को सम्मान देना जानो
अहंकार को मन से दूर भगाओ
अपनी सोच को हमेशा ऊँचा उठाओ


     समय की कदर करना सीखते जाओ
     अपने कर्मों से पहचान बनाते जाओ
     धैर्य और विश्वास को अपना मित्र बनाओ
     सफलता का मार्ग स्वयं तैयार बनाओ


भलाई का बीज जहाँ भी बोओगे
मीठे फल जीवन में वही पाओगे
खुशियों का सूरज हर दिन उगता रहेगा
और आपका जीवन सुंदर बनता रहेगा।

4. जीवन का प्रकाश

जीवन में हमेशा अच्छा सोचते जाना
नफरत की राह से खुद को बचाते जाना
सच्चाई का रास्ता थोड़ा कठिन जरूर होगा
पर उसी रास्ते पर खुशियों का सागर होगा

     दूसरों के दर्द को समझने की कोशिश करना
     अपने मन को हर अहंकार से दूर रखना
     भलाई का छोटा सा काम भी बड़ा होता है
     जो दिल से किया जाए वही सच्चा होता है

समय कभी किसी के लिए नहीं रुकता है
हर इंसान अपने कर्मों से ही झुकता है
धैर्य और विश्वास को जीवन साथी बनाओ
अपनी सोच को हमेशा ऊँचा उठाओ

     मुस्कान बाँटने से दिल हल्का होता है
     प्रेम का दीपक हर घर में जलता होता है
     कभी किसी का भरोसा मत तोड़ना
     सच्चाई की डोर को कभी मत छोड़ना

अच्छे कर्म ही जीवन की पहचान बनाते हैं
यही रास्ते इंसान को महान बनाते हैं।