103. जीवन का पाठ

ये हकीकत है, बंधु सुन लो।
किताबों से सीखो तो नींद आती है।
ज़िंदगी अगर खुद सिखाने लगे।
तो रातें भी अक्सर जाग जाती हैं।

पन्नों पर लिखा सब आसान लगे।
सच का सफर थोड़ा कठिन लगे।
शब्दों में ज्ञान सिमट जाता है।
अनुभव मन को झकझोर जाता है।

कहानी पढ़कर मुस्कान आती है।
पर संघर्ष की आँच रुलाती है।
किताबें राह दिखा सकती हैं।
पर ज़िंदगी भी सब सिखा सकती है।

सपनों की कीमत समझाती है।
अपनों की असलियत दिखाती है।
सफलता का मतलब बताती है।
और हार से उठना सिखाती है।

ये जीवन का गहरा ज्ञान है।
अनुभव ही असली विज्ञान है।
किताबें साथी बन सकती हैं।
पर ज़िंदगी ही गुरु महान है।

102. अति का अंत

अति के बाद क्षति निश्चित है।
     चाहे तुम कितने भी दिग्गज हो।
शक्ति का अहंकार मिट जाता है।
     समय का चक्र भी घूम जाता है।
हर चीज़ की सीमा होती है।
     जीवन में भी रीति होती है।
जो सीमा पार कर जाता है।
     वो अंत में पछताता है।
अधिक बोलना भी भारी होता है।
     अधिक सोचना भी दुख देता है।
अति विश्वास भी चोट करता है।
     अति मोह भी मन तोड़ता है।
संतुलन ही जीवन की कुंजी है।
     यही सबसे बड़ी पूंजी है।
धीरे चलना भी समझदारी है।
     शांति में ही खुशहाली है।
अति का रास्ता अंधेरा लाता है।
     संयम ही आगे बढ़ाता है।
यही जीवन का सच्चा सार है।
     मध्यम मार्ग ही स्वीकार है।

101. आईने का सच

आईना जब भी उठाया करो।
पहले खुद को देखा करो।
फिर दुनिया को दिखाया करो।

     सच का दीप जलाया करो।
     चेहरे से ज्यादा मन पढ़ना।
     अंदर की आवाज़ भी सुनना।

झूठी हँसी को दूर रखना।
सादगी को साथ रखना।
आईना सिर्फ रूप नहीं दिखाता।

     भीतर का हाल भी बताता।
     दिल साफ़ हो तो चमक आए।
     सच की खुशबू भी फैल जाए।

दूसरों में दोष ढूँढना छोड़ो।
अपने अंदर भी झाँक के देखो।
हर खामी को सुधारते जाओ।

     जीवन को सुंदर बनाते जाओ।
     जो जैसा है, वैसा स्वीकारो।
     अहंकार का बोझ उतारो।

आईना जब सच दिखाएगा।
मन भी हल्का हो जाएगा।

100. सीमाओं का खेल

सबके उतने ही रहो जितने वो तुम्हारे हैं।
ज्यादा घुसोगे तो लोग कहते बेचारे हैं।

     अपनी हदें भी थोड़ी समझदार रखो।
     रिश्तों की प्लेट में संतुलन रखो।

कोई बहुत प्यार दिखाए, तो मुस्काओ।
पर दिल की चाबी जल्दी मत थमाओ।

     फोन करे तो दो मिनट बात कर लो।
     वरना लोग लंबी डिमांड धर लो।

सबके लिए दिल पूरा खोलना नहीं।
हर किसी को अपना बोलना नहीं।

     कुछ लोग चाय जैसे गर्म पसंद करते हैं।
     पर बाद में बिना शक्कर के ही चलते हैं।

जो जितना दे, उतना ही लो भाई।
फालतू इमोशन की मत करो कमाई।

     ज़्यादा अच्छे बनोगे तो फँस जाओगे।
     फिर सबके काम में बस लग जाओगे।

थोड़ी दूरी भी जरूरी होती है।
वरना रिश्तों की हालत बुरी होती है।

     सबके उतने ही रहो जितने वो तुम्हारे।
     खुश रहोगे, बचेंगे भी झगड़े सारे।

99. किराए के रिश्ते

कुछ रिश्ते किराए के मकान जैसे होते हैं।
उन्हें कितना भी सजा लो, अपने नहीं होते हैं।

दीवारों पर चाहत की रंगाई कर लो।
फिर भी दिल से कभी जुड़ नहीं होते हैं।

अपना समझकर भी पराया सा लगता है।
हर सपना आधा सा लगता है।

समय की धूल जब जम जाती है।
यादों की खुशबू भी कम हो जाती है।

किराए का घर पल भर का साथ देता है।
पर अपनापन कहाँ साथ रहता है।

जैसे हवा आती है और चली जाती है।
वैसे ही भावना भी टूट जाती है।

रिश्ते भी अगर शर्तों पर हों।
तो प्यार कहाँ फिर दिल में हों।

सच्चाई ही रिश्तों की पहचान है।
विश्वास ही जीवन की शान है।

जो अपना है, वही साथ निभाएगा।
मुश्किल में भी हाथ बढ़ाएगा।

किराए के रिश्ते बदल जाते हैं।
अपने रिश्ते ही रह जाते हैं।

98. हुनर और पहचान

गधों को सफलता मिल जाए कभी।
तो मत समझो हुनर है अभी।
हो सकता है खेल ही बदल गया।
या मौका किसी और से निकल गया।

हर जीत सच की गवाही नहीं।
हर चमक असली स्याही नहीं।
कभी भाग्य भी साथ निभाता है।
अनजाना रास्ता जीत दिलाता है।

हो सकता है घोड़ा रेस में न दौड़ा हो।
अपनी ताकत को उसने न जोड़ा हो।
मौका मिले तो सब दिखता है।
हुनर समय पर ही खिलता है।

सफलता केवल शोर नहीं होती।
सिर्फ भाग्य की डोर नहीं होती।
मेहनत की आग जो भीतर जलती है।
वही असली पहचान बनती है।

दिखावे की दुनिया से दूर रहो।
अपने कर्मों पर ही गर्व करो।
सच्ची जीत धीरे आती है।
पर हमेशा साथ निभाती है।

97. हौसले की रोशनी

अगर कभी बुरा दिन आ जाए।
तो मन को थोड़ा समझा जाए।
याद रखना दिन बुरा होता है।
जिंदगी नहीं बुरा सोता है।

तूफान भी एक दिन थम जाएगा।
अंधेरा भी खुद मिट जाएगा।
हिम्मत का दीप जलाए रखना।
दिल में विश्वास बसाए रखना।

मुश्किलें रास्ता रोक नहीं सकतीं।
सपनों की उड़ान थाम नहीं सकतीं।
हार भी एक सबक सिखाती है।
नई उम्मीदें फिर जगाती है।

समय बदलता रहता हर पल।
संघर्ष भी देगा तुझको बल।
अपने कदम कभी मत रोकना।
आगे ही आगे बस चलना।

याद रख दिन बुरा है जिंदगी नहीं।
हौसले से बड़ी कोई बंदगी नहीं।
खुद पर भरोसा बनाए रखना।
जीवन की लौ जलाए रखना।

96. बुजुर्गों की सीख

बुजुर्ग कहते हैं यह बात पुरानी।
फसल रंग बदले तो काट दो जानी।
     मेहनत का फल समय पर लेना।
     उपज को व्यर्थ नहीं रहने देना।
पर लोगों का रंग जब बदल जाए।
रिश्तों की डोर अगर टूट जाए।
     तो समझदारी से दूरी रखना।
     अपने मन को साफ़ रखना।
फसल में भी मौसम का खेल है।
जीवन भी अनुभवों का मेल है।
     जो पक जाए, वही काम का है।
     समय पर करना ही नाम का है।
लोगों के रंग पहचानना सीखो।
सच और झूठ को परखना सीखो।
     हर किसी पर भरोसा नहीं करना।
     अपने सम्मान को कम नहीं करना।
बुजुर्गों की बातें काम की होती हैं।
जीवन की राहें आसान होती हैं।
     समय सिखाता है सबक अनोखा।
     समझदार बनता हर एक मौका।

95. वक्त का सच

वक्त बर्बाद ना करें दिखावे में।
वरना जिंदगी गुजर जाएगी पछतावे में।
झूठी शान का बोझ मत उठाओ।
सच की राह खुद ही अपनाओ।

     दिखावे की दुनिया बहुत रंगीन लगे।
     पर अंदर से अक्सर खाली मिले।
     अपनी हद में सादगी रखो।
     दिल की आवाज़ को साथ रखो।

समय किसी का इंतज़ार नहीं करता।
बीता पल फिर लौटकर नहीं आता।
जो आज है, उसे जी लेना सीखो।
खुशियों के बीज खुद ही सींचो।

     बाहरी चमक से धोखा मत खाना।
     अंदर की रोशनी को पहचानना।
     अपनी मेहनत पर भरोसा रखना।
     सपनों को मन में संजोए रखना।

दिखावा अंत में खाली करेगा।
सच का रास्ता ही साथ चलेगा।
जो सच्चा है, वही जीत पाएगा।
वक्त का सच सबको समझ आएगा।

94. नियत और सच्चाई

मेरे जूते भी तेरी नियत से ज्यादा साफ हैं।
यह बात कड़वी है, पर जीवन का सच्चा माप है।
दिखावे की चमक ज्यादा देर नहीं टिकती।
झूठ की महक भी दिल तक नहीं पहुँचती।

चेहरे पर मुस्कान, अंदर छल न रखो।
अपनी सोच में कभी मल न रखो।
सच्चाई का रास्ता थोड़ा कठिन होगा।
पर अंत में वही सबसे सुखद होगा।

दूसरों को गिराने की आदत छोड़ो।
अपने भीतर की नीयत को जोड़ो।
किसी की कमजोरी का मज़ाक न उड़ाओ।
इंसानियत को अपने दिल में बसाओ।

शब्दों में मधुरता होना जरूरी है।
व्यवहार में सादगी भी पूरी है।
अहंकार का बोझ लेकर मत चलो।
समय के आगे सिर झुका कर चलो।

जो सच्चा है, वही आगे जाएगा।
धोखा देने वाला खुद पछताएगा।
मेहनत ही सबसे बड़ी पहचान है।
साफ दिल ही सबसे महान है।

93. संयम की शक्ति

जिसने खुद को भीतर समेटा है।
वो किसी को बिखरने नहीं देता।
जो अपने दर्द को चुपचाप सहता है।
वो दूसरों का हाथ नहीं छोड़ता।

संयम ही सबसे बड़ी ताकत है।
शांत मन की अलग ही राहत है।
जो अपने मन को जीत लेता है।
वही जीवन की राह चुन लेता है।

क्रोध को जिसने दूर रखा है।
समझ को दिल में भर रखा है।
वो मुश्किल में भी मुस्कुराता है।
हर तूफान को पीछे हटाता है।

अपने घाव खुद ही भरना है।
आगे बढ़ते रहना ही धर्म है।
हार भी एक सीख सिखाती है।
नई उम्मीदें फिर जगाती है।

जो खुद को संभालना जानता है।
वो दुनिया को भी पहचानता है।
संयम में ही विजय छुपी है।
यही जीवन की असली शक्ति है।

92.  संबंध की असली पहचान

संबंध का अर्थ है सम्मान देना।
पीठ पीछे भी मान बनाए रखना।

सच्चाई रिश्तों की नींव होती है।
विश्वास ही जीवन की धुन होती है।

मुँह पर मीठा, पीछे जहर नहीं।
रिश्तों में कोई कहर नहीं।

जो दिल में है, वही ज़ुबान पर हो।
हर रिश्ता सच्चे ईमान पर हो।

अपनों की इज्जत छुपकर भी हो।
भावनाओं की हिफ़ाज़त सबमें हो।

बातों में सादगी बनी रहे।
विश्वास की रोशनी जली रहे।

नाम खराब करने की चाह नहीं।
रिश्तों में कोई आह नहीं।

संबंधों में दूरी भी जरूरी है।
पर सम्मान की राह भी पूरी है।

पीठ पीछे भी आदर रखना।
यही संबंधों का गहना रखना।

यही जीवन का सच्चा सार है।
सम्मान ही सबसे बड़ा प्यार है।

91. सत्य की समझ

सत्य को समझने के लिए कान नहीं।
धैर्य की गहरी पहचान चाहिए।

शब्दों से ज्यादा चुप्पी बोलती है।
भीतर की आँखें खुली चाहिए।

जल्दी में सत्य नहीं मिलता है।
समय के साथ ही खिलता है।

हर बात सुनना जरूरी नहीं।
हर आवाज़ सच की धुरी नहीं।

मन को थोड़ा शांत करना है।
सच को भीतर से पढ़ना है।

गुस्से को धीरे छोड़ देना है।
समझ को आगे जोड़ देना है।

धैर्य ही सत्य की कुंजी है।
यही जीवन की असली पूंजी है।

सच का मार्ग कठिन जरूर है।
पर आत्मा का वही नूर है।

कानों से नहीं, मन से सुनो।
सत्य के दीपक भीतर चुनो।

धैर्य रखो, राह खुल जाएगी।
सत्य की महिमा समझ आएगी।

90. अच्छे लोगों की पहचान

अच्छे लोगों में एक खास बात होती है।
वो बुरे वक्त में भी अच्छे होते हैं।
दिल में उनके सच्चाई बसती है।
हर हाल में अच्छाई ही दिखती है।

क्रोध भी उनके आगे झुक जाता है।
धैर्य का दीपक जलता जाता है।
परिस्थिति चाहे कितनी भी कठिन हो।
उनका मन कभी नहीं दीन हो।

दूसरों का दर्द समझ लेते हैं।
खुशियाँ भी बाँट कर लेते हैं।
शब्दों में उनके मिठास रहती है।
नज़रों में सादगी खास रहती है।

नफ़रत से दूरी बनाए रखते हैं।
मोहब्बत को आगे बढ़ाए रखते हैं।
समय के साथ वो ढलते नहीं।
सच के रास्ते से हटते नहीं।

अच्छाई उनकी पहचान बनती है।
इंसानियत ही उनकी शान बनती है।
अंधेरे में भी रोशनी देते हैं।
अच्छे लोग यही संदेश देते हैं।

89. अंत का सच

अंत में कुछ भी ठीक नहीं होता।
अंत में सिर्फ अंत ही होता।

     किसी के सपनों का अंत होता है।
     किसी की उम्मीदों का अंत होता है।

किसी की भावनाएँ टूट जाती हैं।
यादें चुपचाप सो जाती हैं।

     किसी के किरदार का अंत होता है।
     कहानी का एक अध्याय बंद होता है।

समय अपने पंख समेट लेता है।
सच भी चुपचाप लेट जाता है।

     हँसी भी कहीं खो जाती है।
     आँखें बस नम हो जाती हैं।

जो था, वह पीछे रह जाता है।
जो है, वह भी बदल जाता है।

     सपनों की राहें मिट जाती हैं।
     इच्छाएँ धीरे थक जाती हैं।

अंत एक मौन सा संदेश है।
जीवन का अपना विशेष है।

     शुरुआत भी अंत में छुपी रहती है।
     नई कहानी फिर जन्म लेती है।

88. बोझ का सागर

हमेशा याद रखिए यह बात।
ज्यादा बोझ डुबो देता है साथ।
     क्रोध का बोझ मन पर मत रखो।
     शांति का दीपक भीतर ही रखो।

बदले की आग भी जलाती है।
धीरे धीरे आत्मा गलाती है।
     अभिमान का भार भारी होता है।
     अंत में सब बेकार होता है।

जो बोझ उठाए, वही थकता है।
समय के आगे सब झुकता है।
     हल्का मन ही आगे चलता है।
     सच का सूरज उसी में पलता है।

नफ़रत का बोझ मत ढोना कभी।
दिल को घायल मत करना सभी।
     मोहब्बत से राह आसान बनती है।
     जिंदगी खुद मुस्कान चुनती है।

छोड़ दो जो मन को भारी करे।
साधारण जीवन ही सार भरे।
     जो हल्का चले, वही जीतता है।
     शांति में ही जीवन जीता है।

87. सच की आवाज़

जब तुम उनकी भाषा में बोलने लगते हो।
लोग अपनी ही बात से चौंकने लगते हैं।

सच की चुभन भी हल्की नहीं होती है।
झूठ की नींद अचानक टूट जाती है।

जब जवाब आईना बनकर आता है।
चेहरा अंदर का सच दिखाता है।

अपने शब्द भी भारी लगने लगते हैं।
अपने ही तर्क टकराने लगते हैं।

सत्य की राह आसान कहाँ होती है।
हर आवाज़ सबको रास कहाँ होती है।

अपनी ही परछाईं से डर लगता है।
जब सच की किरणें भीतर जगता है।

लोगों को अपनी तारीफ पसंद होती है।
सच सुनने की हिम्मत कम होती है।

जब शब्द बराबरी से जवाब देते हैं।
अहंकार के पर धीरे टूटते हैं।

सच बोलना भी एक संघर्ष है।
खामोश रहना भी एक विकल्प है।

लेकिन सत्य कभी चुप नहीं रहता।
धीरे धीरे अपना मार्ग चुन लेता।

86. इंसान की परतें

किसी से मिलते ही फैसला ना किया करो।
     इंसान है, परतों में धीरे खुलता है।

पहली नज़र में सच कहाँ मिलता है।
     हर चेहरा अंदर कुछ और रखता है।

हँसी के पीछे भी दर्द छुपा रहता है।
     खामोश आँखों में शोर छुपा रहता है।

हर बात को समझने का वक्त चाहिए।
     हर राज़ को खुलने का हक चाहिए।

जल्दी में किसी को परखो मत।
     दिल की किताब यूँ ही पढ़ो मत।

हर शख्स कहानी लेकर चलता है।
     हर जख्म निशानी लेकर चलता है।

शब्दों से ज्यादा चुप्पी बोलती है।
     धीरे से ही सच्चाई खोलती है।

परत दर परत पहचान बनती है।
     समय से ही तस्वीर साफ़ होती है।

नफ़रत भी अक्सर डर से जन्मती है।
     मोहब्बत भी अंदर से ही पलती है।

धैर्य रखो, समझ बढ़ती जाएगी।
     इंसानियत खुद राह दिखाएगी।

85. आत्मा की पुकार

इस संसार में समय सीमित है।
भीतर की आवाज़ ही सही जीत है।
     हर किसी को खुश करना जरूरी नहीं।
    अपनी आत्मा को संतुष्ट करना ही सही।

लोगों की भीड़ बदलती रहती है।
उनकी सोच भी चलती रहती है।
     अपनी राह खुद चुननी होती है।
     दिल की बात भी सुननी होती है।

झूठी तारीफों का जाल न बुनो।
सच के दीपक मन में चुनो।
     दिखावे की दुनिया से दूर रहो।
     अपने सच्चे स्वरूप में ही रहो।

समाज की मंज़ूरी जरूरी नहीं है।
स्वाभिमान से बड़ी कोई खुशी नहीं है।
     अपनी शांति को मत खोना कभी।
     अंदर की रोशनी को संजोना सभी।

समय एक दिन चुपचाप जाएगा।
सिर्फ कर्म ही साथ निभाएगा।
     आत्मा संतुष्ट रहे यही प्रार्थना है।
     जीवन की सबसे बड़ी साधना है।

खुद से प्रेम करना सीख लो।
सच्चे सत्य को ही जी लो।

84. बुढ़ापे की खामोशी

बुढ़ापा एक ठहरा हुआ समंदर है।
     जहाँ लहरें कम, यादें ज्यादा हैं।

हर सवाल का जवाब भीतर रहता है।
     पर सुनने वाला कोई पास नहीं रहता है।

आँखों में बीते कल का साया है।
     हाथों में अनुभव की गहरी माया है।

कदम धीरे चलते, मन तेज भागता है।
     बीता बचपन फिर से पुकारता है।

चुप्पी भी अब दोस्त सी लगती है।
     रातें अक्सर लंबी सी लगती हैं।

पुरानी तस्वीरें मुस्कुराती हैं।
     खामोश कहानियाँ दोहराती हैं।

सपनों की उम्र अब थक गई है।
     इच्छाओं की दौड़ भी रुक गई है।

अपनों की भीड़ कम होती जाती है।
     यादों की दुनिया ही संग रह जाती है।

दिल में बातें बहुत छुपी रहती हैं।
     पर होंठों पर हँसी सजी रहती है।

समय अपने कदम धीरे रखता है।
     बुढ़ापा भीतर से चुपचाप बहता है।

हर उत्तर है, कोई प्रश्न नहीं है।
     फिर भी जीवन में पूर्ण विराम नहीं है।