होशियारपुर सिंह बहुत ही मेहनती लेकिन थोड़ा जिद्दी स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्हें लगता था कि सफलता हमेशा सीधे रास्ते से मिलनी चाहिए, लेकिन जीवन ने उन्हें सिखाया कि कई बार लक्ष्य तक पहुँचने के लिए तरीका बदलना पड़ता है।
एक दिन होशियारपुर सिंह को ऑफिस में एक मुश्किल काम दिया गया। काम ऐसा था जिसमें उन्हें कई बार असफलता का सामना करना पड़ा। वह बार-बार कोशिश करते, लेकिन हर बार कुछ न कुछ गलती हो जाती। परेशान होकर वे सोचने लगे कि शायद यह काम उनके बस का नहीं है।
उनके एक मित्र ने उनसे कहा, “अगर सीधे तरीके से काम नहीं बन रहा है, तो तरीका बदलकर देखो। कभी-कभी घी टेढ़ी उंगली से ही निकलता है।”
होशियारपुर सिंह ने इस बात पर ध्यान दिया। उन्होंने सोचा कि अगर एक तरीका काम नहीं कर रहा है तो हार मानने के बजाय दूसरा तरीका अपनाना चाहिए। उन्होंने अपने काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटना शुरू किया और धैर्यपूर्वक हर चरण पूरा करने लगे।
जहाँ पहले काम बहुत कठिन लगता था, अब वही काम धीरे-धीरे आसान लगने लगा। होशियारपुर सिंह ने महसूस किया कि मेहनत के साथ समझदारी भी उतनी ही जरूरी है।
कुछ दिनों बाद उन्होंने अपना काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। उनके वरिष्ठ अधिकारी ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा, “आपने धैर्य और समझदारी से काम किया, यही सफलता की असली कुंजी है।”
होशियारपुर सिंह मुस्कुराते हुए बोले, “मुझे समझ आ गया कि अगर सीधे रास्ते से काम न बने, तो प्रयास छोड़ना नहीं चाहिए, बल्कि तरीका बदलना चाहिए।”
उस दिन उन्होंने जीवन की एक महत्वपूर्ण सीख ली कि कई बार सफलता पाने के लिए टेढ़ी उंगली का प्रयोग करना पड़ता है, लेकिन उद्देश्य हमेशा साफ और ईमानदार होना चाहिए।