रोहन बहुत ही शरारती और मजाकिया स्वभाव का लड़का था। उसकी सबसे बड़ी खासियत थी कि वह किसी भी बात को कहानी में बदल सकता था। दोस्तों के बीच उसकी पहचान ऐसे व्यक्ति की थी जो बस आँख मारता और फिर लंबी कहानी शुरू कर देता।
एक दिन रोहन अपने दोस्तों के साथ पार्क में बैठा था। तभी सामने से एक व्यक्ति हाथ में बड़ा सा सूटकेस लेकर आता दिखाई दिया। रोहन ने धीरे से आँख मारी और बोला, “अब देखो कहानी शुरू होती है।”
दोस्तों ने पूछा, “क्या हुआ?” रोहन ने कहा, “यह आदमी जरूर कोई जासूस है।” दोस्तों ने पूछा, “कैसे?” रोहन बोला, “देखो, यह इधर-उधर ऐसे देख रहा है जैसे कोई राज़ छिपा रहा हो।”
रोहन ने अपनी कहानी आगे बढ़ाई और बोला, “शायद इसके सूटकेस में खजाना है।” एक दोस्त बोला, “या फिर कपड़े होंगे।” रोहन ने कहा, “नहीं, जासूसों के सूटकेस में हमेशा रहस्यमय चीजें होती हैं।”
तभी वह आदमी उनके पास आकर बैठ गया। रोहन थोड़ा डर गया लेकिन फिर भी उसने आँख मारकर कहानी जारी रखी। उसने कहा, “लगता है आज रहस्य खुलने वाला है।”
आदमी ने मुस्कुराकर कहा, “बेटा, अगर तुम मेरे सूटकेस के बारे में बात कर रहे हो तो बता दूँ, इसमें सिर्फ ऑफिस के कागज हैं।”
रोहन थोड़ा शर्मिंदा हो गया लेकिन उसने फिर भी कहानी जारी रखी। उसने दोस्तों से कहा, “देखा, जासूस लोग कभी सच नहीं बताते।”
थोड़ी देर बाद वह आदमी उठा और चला गया। रोहन ने कहा, “कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।”
दोस्त हँसते हुए बोले, “अब क्या होगा?” रोहन बोला, “अब शायद कोई और रहस्य आएगा।”
लेकिन उस दिन पार्क में कोई रहस्य नहीं आया, सिर्फ रोहन की कहानी चलती रही। वह हर गुजरते व्यक्ति को देखकर आँख मारता और नई कहानी शुरू करने की कोशिश करता रहा।
शाम को घर लौटते समय उसके दोस्त बोले, “रोहन, तुम्हारी आँख मारने की आदत कभी तुम्हें बड़ी कहानीकार बना देगी।”
रोहन मुस्कुराया और बोला, “कहानी शुरू करने के लिए सिर्फ एक आँख मारना काफी है!”