विकास बहुत बड़े प्लान बनाने में माहिर था। वह हर महीने नई योजना बनाता, लेकिन उसका परिणाम हमेशा वही रहता था—ढाक के तीन पात। उसके दोस्त मजाक में कहते थे कि विकास की योजनाएँ ऐसी होती हैं जैसे कागज पर बहुत शानदार, लेकिन असल जिंदगी में हवा।
इस बार विकास ने फैसला किया कि वह अपनी जिंदगी को पूरी तरह बदल देगा। उसने एक नोटबुक निकाली और बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा—“नई योजना – सफलता की ओर पहला कदम।”
पहली योजना थी सुबह जल्दी उठने की। विकास ने अलार्म लगाया और सोचा कि अब वह बिल्कुल अनुशासित व्यक्ति बन जाएगा। लेकिन सुबह अलार्म बजते ही उसने आँख बंद करके उसे बंद कर दिया और कहा, “बस पाँच मिनट और।” पाँच मिनट कभी खत्म नहीं हुए और वह दो घंटे बाद उठा।
दूसरी योजना थी रोज व्यायाम करने की। विकास ने घर के सामने पार्क में जाने का फैसला किया। वह पार्क तक पहुँचा भी, लेकिन वहाँ बैठकर मोबाइल देखने लगा और बोला, “आज बस शुरुआत है।”
तीसरी योजना थी कम खर्च करने की। विकास ने खुद से कहा कि अब अनावश्यक चीजें नहीं खरीदेगा। लेकिन उसी दिन एक ऑनलाइन सेल का मैसेज आया जिसमें लिखा था—“स्पेशल ऑफर, आज ही खरीदें।” विकास ने सोचा, “बस एक चीज खरीदने में क्या जाता है!” और दो-तीन चीजें ऑर्डर कर दीं।
शाम को विकास ने अपनी योजना की प्रगति की समीक्षा की। उसने पाया कि न तो वह जल्दी उठा, न व्यायाम किया और न ही खर्च कम किया। वह सिर पकड़कर बोला, “मेरी योजना फिर ढाक के तीन पात ही निकली।”
उसकी पत्नी हँसते हुए बोली, “तुम हर बार बड़ी योजना बनाते हो, लेकिन उसे पूरा करने के लिए छोटी मेहनत भूल जाते हो।”
अगले दिन विकास ने तय किया कि वह पहले छोटे कदम उठाएगा। लेकिन मन ही मन वह जानता था कि बड़े प्लान बनाना उसकी आदत है, और शायद ढाक के तीन पात वाली कहानी फिर दोहराई जाएगी।