राकेश बड़े गर्व से कहता था कि वह जब भी बाजार जाता है, सबसे पहले सेल वाले बोर्ड को ढूँढता है। उसे लगता था कि सेल का मतलब होता है—अच्छा सामान और कम कीमत। लेकिन असल में वह हर बार दुकानदार की चालाकी का शिकार हो जाता था।
एक दिन राकेश अखबार में पढ़कर खुश हो गया कि शहर के बड़े मॉल में “बंपर सेल” लगी है। वह तुरंत मॉल पहुँच गया। अंदर जाते ही उसे चमकदार बोर्ड दिखाई दिया जिस पर लिखा था – “50% तक छूट।” राकेश के मन में लड्डू फूटने लगे। उसने सोचा आज तो जमकर खरीदारी होगी।
सबसे पहले वह एक शर्ट देखने लगा। शर्ट का दाम देखकर उसकी आँखें चमक गईं क्योंकि उस पर बड़ा सा लाल स्टीकर लगा था जिस पर लिखा था – “पहले 2000 रुपये, अब सिर्फ 1999 रुपये।” राकेश ने मन ही मन सोचा, “वाह! इतनी बड़ी छूट!” और खुशी-खुशी शर्ट खरीद ली।
फिर वह जूते देखने पहुँचा। वहाँ भी एक जोड़ी जूते पर लिखा था – “स्पेशल सेल ऑफर।” राकेश ने पूछा, “भैया, इसकी क्या कीमत है?” दुकानदार मुस्कुराया और बोला, “बस 4999 रुपये, पहले 5000 था!” राकेश ने सोचा, “इतनी बड़ी बचत!” और जूते भी खरीद लिए।
घर आकर जब उसने बिल देखा तो उसका सिर घूम गया। उसे समझ में आया कि सेल के नाम पर उसकी जेब हल्की और बैग भारी हो गया था। उसने गुस्से में कहा, “इन दुकानदारों ने तो सचमुच आँखों में धूल झोंक दी!”
अगले दिन राकेश अपने दोस्त के पास पहुँचा और बोला, “भाई, अब मैं सेल के चक्कर में नहीं पड़ूँगा।” दोस्त हँसते हुए बोला, “जब तक बोर्ड पर छूट की चमक रहेगी, तुम जरूर फँसोगे।”
राकेश ने गंभीर होकर कहा, “अब मैं पहले दाम पूछूँगा, फिर सोचूँगा, फिर तीन बार हिसाब लगाऊँगा।”
लेकिन उसी शाम उसने फिर एक बोर्ड देखा – “आज विशेष ऑफर!” राकेश खुद को रोक नहीं पाया और धीरे-धीरे दुकान की ओर बढ़ गया, मन ही मन बड़बड़ाते हुए – “बस एक बार और… शायद सच में बचत हो जाए!”