रमेश बहुत बहादुर बनने का दिखावा करता था, लेकिन सच यह था कि वह अंधेरे से बहुत डरता था। उसके दोस्तों ने उसे चैलेंज दिया कि अगर वह खुद को बहादुर साबित करना चाहता है तो रात की एक हॉरर फिल्म देखकर आए। रमेश ने भी जोश में आकर कह दिया, “मैं तो अकेले ही फिल्म देखने जाऊँगा!” लेकिन अंदर से उसका कलेजा जोर-जोर से धड़क रहा था।
रात को रमेश अकेला हॉरर फिल्म देखने सिनेमा हॉल पहुँच गया। फिल्म शुरू होते ही डरावनी आवाजें आने लगीं और स्क्रीन पर एक सफेद साड़ी वाली भूतनी दिखाई दी। भूतनी धीरे-धीरे चलती हुई हीरो के पीछे आकर खड़ी हो गई। रमेश ने डर के मारे आँखें बंद कर लीं और मन ही मन भगवान को याद करने लगा। तभी किसी ने उसके कंधे पर हल्के से हाथ रखा। रमेश की चीख निकलते-निकलते रह गई।
जब उसने डरते-डरते पीछे देखा तो पाया कि वह एक छोटा बच्चा था जो पॉपकॉर्न का डिब्बा पकड़कर खड़ा था। रमेश ने राहत की साँस ली और फिर फिल्म देखने लगा। पर जैसे ही फिल्म में भूतनी ने जोर से हँसना शुरू किया, रमेश ने सोचा कि शायद भूतनी सच में स्क्रीन से बाहर आ जाएगी। उसने अपने हाथ में पकड़ा पानी का गिलास कसकर पकड़ लिया।
अचानक हॉल की लाइट झपकी और स्क्रीन बंद हो गई। कुछ लोग शोर करने लगे। तभी सफाई कर्मचारी आया और बोला, “बिजली चली गई है, आप लोग पाँच मिनट शांत रहें।” रमेश ने सोचा, भूत का हमला तो नहीं हो गया! डर के मारे उसका कलेजा सचमुच मुँह को आने लगा।
कुछ देर बाद लाइट वापस आ गई और फिल्म फिर शुरू हो गई। लेकिन अब रमेश को फिल्म में डर कम और अपनी ही हालत पर ज्यादा हँसी आने लगी। फिल्म खत्म होने पर वह बहादुर बनने का नाटक करते हुए बाहर निकला, लेकिन घर पहुँचकर उसने तय किया कि अगली बार कॉमेडी फिल्म ही देखेगा।