गाँव की “वीर इलेवन” क्रिकेट टीम बहुत घमंडी मानी जाती थी। टीम के खिलाड़ी हर मैच से पहले कहते थे, “आज तो विरोधी टीम को धूल चटा देंगे।” लेकिन गाँव वाले मुस्कुराकर कहते थे, “देखते हैं, धूल कौन किसको चटाता है।”
उस दिन गाँव में दूसरी टीम के साथ बड़ा मैच था। वीर इलेवन के कप्तान मुन्ना जी पूरे आत्मविश्वास में मैदान पर उतरे। उन्होंने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और बोले, “आज स्कोर बोर्ड टूट जाएगा।”
पहले बल्लेबाज बल्ला घुमाते ही गेंद को हवा में उछाल बैठे। गेंद इतनी ऊपर गई कि लोग सोचने लगे कि शायद वह आसमान देखने गई है। जब गेंद नीचे आई तो बल्लेबाज खुद ही आउट हो गया।
दूसरे बल्लेबाज मैदान पर आए और बोले, “आज मैं धूम मचा दूँगा।” लेकिन पहली ही गेंद देखकर उन्होंने इतना जोर से बल्ला घुमाया कि बल्ला हवा में घूमकर पीछे गिर गया और गेंद विकेट पर जा लगी।
फील्डिंग करते समय भी टीम का हाल बुरा था। एक खिलाड़ी कैच पकड़ने के लिए दौड़े, लेकिन गेंद उनके हाथ से ऐसे निकल गई जैसे साबुन लगा हो।
कप्तान मुन्ना जी चिल्लाए, “ध्यान से! विरोधी टीम को धूल चटानी है।”
दूसरी टीम के बल्लेबाज बड़े शांत तरीके से खेल रहे थे। उन्होंने चौके और छक्के ऐसे लगाए जैसे अभ्यास कर रहे हों।
वीर इलेवन की टीम का स्कोर बहुत कम रह गया। आखिरी ओवर में कप्तान मुन्ना जी बोले, “अब हारने का समय नहीं, कुछ कर दिखाओ।”
लेकिन आखिरी गेंद पर खिलाड़ी दौड़े, गिर पड़े और रन भी नहीं बना पाए।
मैच खत्म हुआ और वीर इलेवन टीम बुरी तरह हार गई।
मैदान से बाहर आते हुए कप्तान मुन्ना जी ने कहा, “आज हम धूल चटाने आए थे, लेकिन खुद ही धूल में लोटपोट हो गए।”
गाँव वाले हँसते हुए बोले, “कभी-कभी घमंड नहीं, बल्कि खेल भावना ही असली जीत होती है।”