हमारे मोहल्ले में पिंकी की शादी पूरे साल की सबसे बड़ी घटना बन गई थी। पिंकी के पापा हर मिलने वाले से कहते फिरते थे, “भाई साहब, ऐसी शादी करूँगा कि लोग देखते रह जाएँ।” और सच पूछिए तो उन्होंने दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
शादी से पहले ही घर के बाहर रोशनी ऐसी लगा दी गई थी कि बिजली विभाग को अलग से सूचना देनी पड़ी। गली के बच्चे रोज़ शाम को वहीं घूमने आते, मानो मेले का उद्घाटन होने वाला हो। पिंकी की मम्मी हर आने-जाने वाले को गहनों की झलक दिखाकर कहतीं, “हाथ कंगन को आरसी क्या!”
बारात वाले दिन तो दृश्य और भी रोचक था। बैंड ऐसा बज रहा था कि घोड़ी भी ताल में सिर हिला रही थी। दूल्हा महाशय सेहरे में इतने गंभीर थे जैसे कोई बोर्ड परीक्षा देने जा रहे हों। उधर पिंकी स्टेज पर बैठी मुस्कुरा रही थी, लेकिन उसकी सहेलियाँ लगातार फोटो खिंचवा रही थीं, ताकि सोशल मीडिया पर कोई कमी न रह जाए।
खाने के पंडाल में पचास तरह के व्यंजन थे। चाट से लेकर पास्ता तक, और मिठाइयों की तो पूरी फौज थी। हर मेहमान प्लेट लेकर घूम रहा था और पूछ रहा था, “कुछ छूट तो नहीं गया?” पिंकी के पापा गर्व से सबको समझा रहे थे, “देख लीजिए, हाथ कंगन को आरसी क्या, सब सामने है!”
लेकिन असली मज़ा तब आया जब फोटोग्राफर ने माइक पकड़कर घोषणा की, “जो भी स्टेज पर आएगा, पहले लिफाफा दिखाएगा।” कुछ मेहमानों के चेहरे पर हल्की चिंता तैर गई।
विदाई के समय सबकी आँखें नम थीं, लेकिन पिंकी के छोटे भाई ने धीरे से कहा, “पापा, अब तो लोन भी दिख जाएगा, आरसी की ज़रूरत नहीं।”
पूरा परिवार हँसी रोकते-रोकते रह गया।
शादी शानदार थी, इंतज़ाम लाजवाब थे, और दिखावा भी पूरे शान से हुआ। मोहल्ले में महीनों तक चर्चा चलती रही कि सचमुच वह शादी ऐसी थी जिसमें कुछ छिपाने जैसा था ही नहीं—हाथ कंगन को आरसी क्या!