शादी का दिन था और शर्मा जी का बेटा राजू दूल्हे के जोड़े में तैयार बैठा था। लेकिन राजू का चेहरा ऐसा था जैसे किसी ने उसका मनपसंद मोबाइल छीन लिया हो। वह बार-बार आईने में देखकर अपना मुंह टेढ़ा कर रहा था।
माँ ने पूछा, “राजू, खुश नहीं लग रहा? शादी है आज।”
राजू ने लंबी साँस लेकर कहा, “माँ, मुझे डर लग रहा है।”
पड़ोसी चाचा बोले, “अरे बेटा, शादी कोई परीक्षा नहीं है।”
राजू बोला, “परीक्षा से भी ज्यादा मुश्किल है, क्योंकि यहाँ सवाल पूछने वाला टीचर नहीं, पत्नी होगी।”
यह सुनकर कुछ लोग हँस पड़े।
दूल्हे की बारात निकलने वाली थी, लेकिन राजू का मुंह अभी भी लटका हुआ था जैसे किसी ने उसे बिना नमक की सब्जी खिला दी हो। दोस्त ने कहा, “भाई, मुस्कुरा ले, फोटो खराब हो जाएगी।”
राजू बोला, “फोटो तो बाद में आएगी, अभी तो जिंदगी का सवाल है।”
बारात जैसे ही दुल्हन के घर पहुँची, ढोल बजने लगे। राजू ने घबराकर कहा, “ढोल इतना जोर से क्यों बज रहा है?”
दोस्त ने कहा, “यह तुम्हारे स्वागत में है।”
जयमाला के समय दुल्हन मुस्कुराकर आई तो राजू और ज्यादा घबरा गया। उसके चेहरे पर मुस्कान की जगह चिंता के बादल घूमने लगे।
जैसे ही दुल्हन ने माला पहनाई, राजू ने धीरे से कहा, “मैं अभी भाग सकता हूँ क्या?”
पास खड़े पंडित जी ने सुन लिया और बोले, “शादी का मुहूर्त भागने के लिए नहीं होता।”
फोटो खिंचाने के समय भी राजू का मुंह लटका रहा। फोटोग्राफर बोला, “भाई साहब, थोड़ा खुश हो जाइए।”
राजू ने कहा, “खुशी अंदर है, बाहर आने का रास्ता ढूंढ रही है।”
शादी खत्म होने के बाद दोस्त ने पूछा, “अब कैसा लग रहा है?”
राजू बोला, “पहले डर था, अब थोड़ी राहत है… क्योंकि शादी हो गई।”
रात को घर पहुँचकर राजू ने सोचा कि मुंह लटकाना शायद बेकार था, क्योंकि शादी तो हो ही गई।
मोहल्ले वाले कहते हैं कि उस दिन मुंह लटकाए दूल्हा भी समझ गया कि शादी में मुस्कान जरूरी है, वरना लोग सोचते हैं कि दूल्हा अभी भी भागने की योजना बना रहा है।