रवि बहुत खुश था क्योंकि गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू होने वाली थीं। उसने पहले ही योजना बना ली थी कि वह सुबह देर तक सोएगा, दिन में दोस्तों के साथ खेल खेलेगा और शाम को टीवी देखकर आराम करेगा। लेकिन किस्मत को शायद उसकी योजना पसंद नहीं आई।
जैसे ही स्कूल की आखिरी घंटी बजी, टीचर ने मुस्कुराकर कहा, “बच्चों, छुट्टियों में रोज दो घंटे पढ़ाई जरूर करना।” यह सुनकर रवि का दिल थोड़ा बैठ गया, लेकिन उसने सोचा, “दो घंटे पढ़ाई भी छुट्टी का ही हिस्सा है।”
घर पहुँचकर रवि ने अपनी छुट्टियों की लिस्ट बनाई – सोना, खेलना, घूमना और मौज करना। लेकिन तभी माँ ने कहा, “छुट्टियों में घर की सफाई भी होगी।” रवि ने सोचा कि शायद यह भी किसी खेल का नाम है।
अगले दिन सुबह माँ ने कहा, “आज से बर्तन धोने का अभ्यास शुरू करो।” रवि ने कहा, “माँ, मैं पढ़ाई की छुट्टी पर हूँ, काम की नहीं।” माँ बोलीं, “छुट्टियाँ हाथ-पैर आराम के लिए हैं, दिमाग के लिए नहीं।”
दोपहर में दोस्त खेलने आए। जैसे ही रवि बाहर जाने लगा, माँ ने कहा, “पहले होमवर्क पूरा करो।” रवि ने दुखी होकर कहा, “छुट्टियाँ तो खटाई में पड़ गईं।”
शाम को टीवी देखने बैठा तो बिजली चली गई। रवि ने ऊपर देखकर कहा, “लगता है छुट्टियाँ भी मुझसे नाराज़ हैं।”
अगले दिन दादी आईं और बोलीं, “छुट्टियों में कुछ नया सीखो।” रवि ने पूछा, “क्या?” दादी बोलीं, “सब्जी काटना, झाड़ू लगाना और जल्दी उठना।”
रवि को लगा कि उसकी छुट्टियाँ किसी सख्त ट्रेनिंग कैंप में बदल गई हैं। उसने दोस्तों को मैसेज भेजा, “मेरी छुट्टियाँ खटाई में पड़ गई हैं।”
आखिरकार रवि ने फैसला किया कि चाहे छुट्टियाँ कितनी भी काम में उलझें, वह थोड़ा समय जरूर मौज-मस्ती के लिए निकालेगा।
रात को छत पर बैठकर उसने सोचा, “छुट्टियाँ सिर्फ आराम के लिए नहीं, बल्कि जिंदगी का स्वाद बढ़ाने के लिए होती हैं।”
और मोहल्ले वाले कहते हैं कि रवि की छुट्टियाँ भले खटाई में पड़ गईं, लेकिन उसकी मुस्कान अभी भी मीठी बनी हुई है।