रमेश जी रोज़ सुबह ऑफिस जाने के लिए बस स्टॉप पर खड़े रहते थे। उनकी आदत थी कि बस आने से पहले आसपास के लोगों को गौर से देखने की, क्योंकि उनका मानना था कि दुनिया में हर चेहरा किसी न किसी कहानी का हिस्सा होता है।
उस दिन भी बस स्टॉप पर भीड़ थी। तभी एक महिला वहाँ आकर खड़ी हुईं। हल्का सा हवा का झोंका आया और उनकी चूड़ी की आवाज़ रमेश जी के कानों तक पहुँची। रमेश जी ने अनजाने में उनकी तरफ देखा और उस महिला ने भी उसी समय उनकी तरफ देख लिया।
बस क्या था… दोनों की आँखें चार हो गईं।
रमेश जी घबरा गए और तुरंत इधर-उधर देखने लगे जैसे कुछ हुआ ही नहीं। लेकिन मन ही मन सोचने लगे कि कहीं महिला यह न समझ लें कि वे जानबूझकर घूर रहे थे।
महिला भी थोड़ी असहज हो गईं और अपना दुपट्टा ठीक करने लगीं। पास खड़ा बच्चा यह सब देखकर फुसफुसाया, “अंकल, लगता है लव स्टोरी शुरू हो गई।”
रमेश जी ने बच्चे को घूरकर चुप रहने का इशारा किया।
इतने में बस आ गई, लेकिन भीड़ इतनी थी कि चढ़ना मुश्किल हो गया। रमेश जी और वह महिला दोनों एक ही दरवाजे की तरफ भागे और फिर अचानक एक-दूसरे को देखकर रुक गए।
महिला ने मुस्कुराकर कहा, “आप पहले चढ़ जाइए।”
रमेश जी बोले, “नहीं, आप पहले।”
बस कंडक्टर चिल्लाया, “जल्दी चढ़िए, बस अभी निकल जाएगी।”
अंत में दोनों एक साथ बस में चढ़ गए और खड़े होने की जगह भी एक ही कोने में मिल गई।
रास्ते में बस के झटके लगने पर कभी रमेश जी महिला की तरफ देखते, कभी खिड़की की तरफ। महिला भी कभी अपने बैग को देखतीं, कभी बाहर भागती दुनिया को।
अचानक स्टॉप आ गया और महिला उतरने लगीं। जाते-जाते उन्होंने हल्की सी मुस्कान देकर कहा, “फिर मिलेंगे।”
रमेश जी बस में खड़े रह गए और सोचने लगे कि आज बस स्टॉप पर आँखें चार तो हुईं, लेकिन बात आगे बढ़ाने की हिम्मत बस स्टॉप पर ही रह गई।
मोहल्ले वाले कहते हैं कि प्यार कभी-कभी बस स्टॉप पर ही शुरू होकर वहीं इंतजार करता रह जाता है।