रमाकांत जी को खाने-पीने का बहुत शौक था। मोहल्ले में लोग मजाक में कहते थे कि अगर खाने की प्रतियोगिता हो तो रमाकांत जी बिना तैयारी के भी जीत सकते हैं। लेकिन डॉक्टर की सलाह ने उनकी जिंदगी उलट-पुलट कर दी।
एक दिन चेकअप के बाद डॉक्टर ने गंभीर चेहरे से कहा, “रमाकांत जी, अगर सेहत ठीक रखनी है तो डाइट करनी पड़ेगी।” यह सुनकर रमाकांत जी को ऐसा लगा जैसे किसी ने उनका मनपसंद खाना छीन लिया हो।
घर आकर उन्होंने पत्नी से कहा, “आज से मैं दिल पर पत्थर रखकर डाइट शुरू करूँगा।” पत्नी मुस्कुराकर बोलीं, “बहुत अच्छा, पहले पत्थर की जगह आलू टिक्की रख लेते तो ज्यादा खुशी होती।”
अगले दिन सुबह रमाकांत जी ने फैसला किया कि नाश्ते में सिर्फ एक सेब खाएंगे। टेबल पर सेब देखकर उनका दिल रोने लगा, लेकिन उन्होंने हिम्मत जुटाकर सेब उठा लिया। जैसे ही पहला कौर लिया, उन्हें लगा जैसे जिंदगी का मजा कम हो रहा है।
दोपहर में पत्नी ने पूछा, “खाने में क्या लोगे?”
रमाकांत जी बोले, “सिर्फ सलाद।”
पत्नी ने उन्हें इतना बड़ा सलाद का कटोरा दिया कि वह देखकर ही डर गए।
शाम को रमाकांत जी टीवी देखते हुए सोच रहे थे कि डाइट करना आसान नहीं है। तभी पड़ोस से पकौड़ों की खुशबू आने लगी। रमाकांत जी ने दिल पर पत्थर रखा और खिड़की बंद कर ली, लेकिन पत्थर थोड़ा हिलता हुआ महसूस हुआ।
रात को पत्नी ने पूछा, “खाना खाओगे?”
रमाकांत जी बोले, “नहीं, मैं डाइट पर हूँ।”
पत्नी ने कहा, “ठीक है, फिर सिर्फ एक रोटी और थोड़ी सब्जी ले लो।”
रमाकांत जी बोले, “डाइट का मतलब भूख से लड़ना नहीं, भूख को समझाना है।”
आधी रात को रमाकांत जी फ्रिज के सामने खड़े थे और सोच रहे थे कि सेहत जरूरी है या स्वाद। अंत में उन्होंने फैसला किया कि डाइट जारी रहेगी… लेकिन धीरे-धीरे।
अगले दिन उन्होंने सेब के साथ आधा समोसा भी खा लिया और दिल पर पत्थर रखने की कोशिश करते हुए बोले, “आज पत्थर थोड़ा हल्का हो गया है।”