स्कूल में मैडम सीमा जी का नाम सुनते ही बच्चे सावधान हो जाते थे। कहा जाता था कि मैडम सीमा जी इतनी सतर्क रहती थीं कि अपनी नाक पर मक्खी भी नहीं बैठने देती थीं। बच्चे तो मजाक में कहते थे कि अगर हवा भी बिना अनुमति आई तो मैडम उससे भी पूछ लेंगी कि कहाँ जा रही हो।
कक्षा में मैडम का अनुशासन सबसे अलग था। जैसे ही घंटी बजती, वे तुरंत क्लास में प्रवेश करतीं और बच्चों को ऐसे देखतीं जैसे सबने मिलकर शरारत की योजना बना रखी हो।
एक दिन क्लास में पिंटू ने धीरे से अपने दोस्त से कहा, “आज गणित का टेस्ट है, मेरी तो जान निकल रही है।” यह बात मैडम के कान तक पहुँच गई। मैडम तुरंत बोलीं, “पिंटू, अगर जान निकल रही है तो पहले टेस्ट दो, बाद में देखेंगे।”
कक्षा में सन्नाटा छा गया।
पिंटू ने डरते-डरते पूछा, “मैडम, क्या हम पानी पीने जा सकते हैं?”
मैडम बोलीं, “पानी पीने के लिए दो मिनट की अनुमति लेनी होगी और वापस आकर बताना होगा कि पानी ठंडा था या गर्म।”
बच्चे हैरान रह गए।
एक दिन क्लास में अचानक एक छोटी मक्खी उड़कर मैडम की तरफ आ गई। बच्चे चुपचाप देखने लगे कि क्या होगा। जैसे ही मक्खी नाक के पास पहुँची, मैडम ने तेज नजरों से उसे देखा और हाथ से ऐसे झटका दिया जैसे कोई बड़ा संकट टाल दिया हो।
पिंटू फुसफुसाया, “देखो, मैडम ने मक्खी को भी डांट दिया।”
दोपहर में मैडम ने पूछा, “किसी को कोई सवाल है?”
गोलू ने साहस करके कहा, “मैडम, अगर मक्खी दोबारा आ गई तो?”
मैडम बोलीं, “तो उसे समझा देना कि यह स्कूल है, कोई पिकनिक स्पॉट नहीं।”
धीरे-धीरे बच्चे मैडम की सख्ती के आदी हो गए। पढ़ाई भी सुधरने लगी क्योंकि क्लास में शरारत करने का समय ही नहीं मिलता था।
साल के अंत में रिजल्ट अच्छा आया तो बच्चे समझ गए कि नाक पर मक्खी न बैठने देने वाली मैडम असल में अनुशासन की उड़ती हुई पाठशाला थीं।
और बच्चे मुस्कुराकर कहते थे, “मैडम सख्त जरूर हैं, लेकिन उनकी सख्ती ने हमें उड़ना सिखा दिया।”