मोहल्ले में श्याम जी की पहचान एक ऐसे पति के रूप में थी जो घर के कामों से दूरी बनाकर रखते थे। पत्नी का कहना था कि श्याम जी की सबसे बड़ी उपलब्धि यही थी कि वे हाथ पर हाथ धरे बैठना बहुत अच्छे से जानते थे।
सुबह होते ही पत्नी रमा जी घर के कामों में लग जातीं और श्याम जी सोफे पर अखबार लेकर ऐसे बैठ जाते जैसे देश की बड़ी समस्याओं पर चिंतन कर रहे हों। कभी अखबार उलटते, कभी टीवी का चैनल बदलते, लेकिन काम की बात पर हमेशा कहते, “अभी थोड़ा आराम कर रहा हूँ।”
एक दिन रमा जी ने कहा, “आज सब्जी बाजार से ले आओ।” श्याम जी बोले, “ठीक है, लेकिन पहले सोच लूँ कि कौन सी सब्जी लेना ज्यादा बुद्धिमानी होगी।” और वे सोफे पर बैठकर सोचने लगे।
एक घंटे बाद रमा जी बोलीं, “सब्जी कहाँ है?”
श्याम जी बोले, “अभी विचार चल रहा है।”
शाम को रमा जी ने गुस्से में कहा, “तुम सिर्फ हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हो।”
श्याम जी मुस्कुराकर बोले, “यह भी एक योगासन है, इसे ‘आलसी ध्यान मुद्रा’ कहते हैं।”
रमा जी ने सिर पकड़ लिया।
अगले दिन बिजली खराब हो गई। रमा जी ने कहा, “मिस्त्री को बुलाओ।”
श्याम जी बोले, “मैं तकनीकी ज्ञान पर शोध कर रहा हूँ, शायद खुद ही ठीक हो जाए।”
लेकिन मिस्त्री आने पर पता चला कि तार जल गया था।
मोहल्ले वाले अक्सर कहते, “श्याम जी बहुत शांत स्वभाव के हैं।” लेकिन रमा जी जानती थीं कि श्याम जी की शांति के पीछे काम से बचने की अद्भुत कला छिपी है।
एक दिन अचानक श्याम जी उठे और बोले, “आज से मैं घर के कामों में मदद करूँगा।” रमा जी हैरान रह गईं।
श्याम जी ने झाड़ू उठाई, लेकिन पाँच मिनट बाद ही बोले, “झाड़ू का हैंडल छोटा है, मेरी कमर दुखने लगी।”
फिर भी रमा जी मुस्कुरा दीं क्योंकि उन्हें पता था कि श्याम जी पूरी तरह बदलें या नहीं, लेकिन हाथ पर हाथ धरे बैठने की उनकी कला अमर रहेगी।