फिल्मी दुनिया के हीरो राजू बड़े ही मशहूर थे। मोहल्ले की लड़कियाँ उनकी एक मुस्कान पर फिदा थीं और बच्चे उन्हें देखकर हीरो-हीरो चिल्लाने लगते थे। राजू जी खुद को बहुत स्टाइलिश समझते थे, लेकिन असली समस्या तब शुरू हुई जब उन्हें पानी से डर लगने लगा।
एक दिन शूटिंग का सीन था जिसमें हीरो को झरने के नीचे खड़े होकर डायलॉग बोलना था। डायरेक्टर ने कहा, “राजू जी, यह सीन बहुत इमोशनल है, आपको बहादुरी दिखानी है।”
राजू जी ने सिर हिलाया लेकिन अंदर से घबरा गए। जैसे ही झरने का पानी चालू हुआ, राजू जी का चेहरा देखने लायक हो गया। पानी पड़ते ही उन्होंने आँखें बंद कर लीं और चुपचाप खड़े रहे।
डायरेक्टर चिल्लाया, “डायलॉग बोलिए!”
राजू जी बोले, “अभी नहीं… पानी कान में चला गया है।”
कई बार कोशिश के बाद भी राजू जी ठीक से डायलॉग नहीं बोल पाए। अचानक उनका पैर फिसला और वे झरने के नीचे ऐसे गिरे जैसे साबुन से नहाने का इरादा हो।
सेट पर मौजूद लोग हँसने लगे। राजू जी उठे और बोले, “मैं हीरो हूँ, कोई पानी का खिलौना नहीं।”
शूटिंग रोकनी पड़ी। मेकअप आर्टिस्ट भागकर आई और बोली, “सर, आपका हेयरस्टाइल पानी में खराब हो गया है।” राजू जी ने गुस्से में कहा, “हीरो का स्टाइल दिल से होता है, बालों से नहीं।”
अगले दिन राजू जी ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने सोचा कि पानी से डरना छोड़ना पड़ेगा। वे घर की छत पर गए और बाल्टी में थोड़ा पानी भरकर खुद पर डाल लिया।
पहली बार में ही जोर से चिल्लाए, “बचाओ!” लेकिन फिर हिम्मत जुटाकर बोले, “मैं हीरो हूँ, पानी मुझसे नहीं जीतेगा।”
धीरे-धीरे राजू जी पानी से दोस्ती करने लगे। शूटिंग भी पूरी हो गई और फिल्म रिलीज होते ही हिट हो गई।
मोहल्ले वाले कहते हैं कि उस दिन राजू जी सच में पानी-पानी हो गए थे, लेकिन फिर भी हीरो बने रहे। और राजू जी आज भी कहते हैं, “हीरो बनने के लिए तलवार नहीं, हिम्मत चाहिए… और कभी-कभी तौलिया भी।”