मोहल्ले में हर कोई दादी की बातों का कायल था। लोग कहते थे कि दादी सिर्फ बातें नहीं करतीं, बल्कि गागर में सागर भर देती हैं। मतलब, छोटी सी बात को ऐसे समझाती थीं जैसे पूरा जीवन दर्शन सुना रही हों। दादी की उम्र तो ज्यादा थी, लेकिन दिमाग आज भी तेज था।
एक दिन पड़ोस का बच्चा रोते हुए दादी के पास आया और बोला, “दादी, मेरा दोस्त मुझसे बात नहीं कर रहा।” दादी ने मुस्कुराकर कहा, “बेटा, रिश्ते पानी की तरह होते हैं, अगर ज्यादा हिलाओगे तो छलक जाएंगे, और अगर बंद रखोगे तो सड़ जाएंगे।”
बच्चा थोड़ा चकराया लेकिन चुप हो गया।
दूसरे दिन मोहल्ले की बहू शिकायत लेकर आई, “दादी, सासू माँ हमेशा टोकती रहती हैं।” दादी ने कहा, “बेटी, घर की चक्की में आटा भी पीसता है और चुप भी रहता है। अगर चक्की बोलेगी तो रोटी नहीं बनेगी।” बहू ने सिर हिलाया, पर समझ कुछ खास नहीं आया।
शाम को दादी के पोते ने पूछा, “दादी, पढ़ाई में मन कैसे लगे?” दादी ने कहा, “बेटा, किताबें ऐसी दोस्त हैं जो ज्यादा बोलती नहीं, लेकिन समझ बहुत देती हैं। अगर उनसे दोस्ती कर लोगे तो परीक्षा भी शर्म से पास हो जाएगी।”
पोता हँसने लगा और बोला, “दादी, आप तो हर बात को कहानी बना देती हो।” दादी बोलीं, “अरे बेटा, जिंदगी खुद एक कहानी है, बस सुनाने वाला चाहिए।”
एक दिन मोहल्ले में बिजली चली गई। लोग परेशान होकर दादी के घर आ गए। किसी ने कहा, “दादी, कुछ उपाय बताइए।” दादी ने कहा, “अंधेरा सिर्फ बाहर है, दिल में अगर उजाला है तो मोमबत्ती भी सूरज लगती है।”
यह सुनकर लोगों ने मोमबत्ती जलाई और दादी की बातें याद करके चुपचाप बैठ गए।
मोहल्ले वाले कहते थे कि दादी उम्र से नहीं, समझदारी से बूढ़ी हुई हैं। उनकी हर बात में ऐसा स्वाद होता था जैसे छोटी सी गागर में पूरा सागर समा गया हो।
और दादी मुस्कुराकर बस इतना कहती थीं, “बेटा, ज्ञान बाँटने से बढ़ता है, और मुस्कुराने से जिंदगी हल्की हो जाती है।”