सुरेश जी बहुत ही साधारण और सीधे-सादे आदमी थे, लेकिन उनके साथ अजीब घटनाएँ अक्सर हो जाती थीं। मोहल्ले में सब लोग कहते थे कि अगर किसी को मनोरंजन चाहिए तो सुरेश जी के साथ बस पाँच मिनट बैठ जाएँ।
एक दिन सुरेश जी ने सोचा कि क्यों न घर की सफाई खुद ही कर ली जाए। पत्नी मायके गई हुई थीं और घर में शांति का माहौल था। उन्होंने झाड़ू उठाई और काम शुरू कर दिया। सोफे के नीचे झाड़ू लगाते ही अचानक एक पुराना डिब्बा बाहर निकला।
सुरेश जी ने सोचा कि शायद इसमें कोई पुरानी चीज होगी। उन्होंने धीरे से डिब्बा खोला तो अंदर से निकली… ढेर सारी मिठाइयाँ। यह देखकर उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। उन्होंने चारों तरफ देखा और सोचा कि कहीं यह सपना तो नहीं।
मिठाइयाँ देखकर सुरेश जी का मन ललचा गया। उन्होंने सोचा कि पत्नी के आने से पहले थोड़ी चखाई कर लेते हैं। एक मिठाई उठाई और खा ली। स्वाद इतना अच्छा लगा कि एक के बाद एक कई मिठाइयाँ गायब हो गईं।
अचानक दरवाजे की घंटी बजी। घबराकर सुरेश जी ने डिब्बा वापस सोफे के नीचे धकेल दिया और चेहरे पर मासूमियत ओढ़ ली। दरवाजा खुला तो सामने उनकी पत्नी खड़ी थीं, जो अचानक ही वापस आ गई थीं।
पत्नी ने घर में कदम रखते ही सूँघते हुए कहा, “यह मिठाई की खुशबू कहाँ से आ रही है?” सुरेश जी ने हकलाते हुए कहा, “क…कौन सी मिठाई?” पत्नी ने सोफे की तरफ इशारा किया और झुककर डिब्बा निकाल लिया।
डिब्बा खोलते ही पत्नी चिल्लाईं, “अरे! यह तो मेरी छुपाकर रखी हुई मिठाइयाँ थीं, जो मैं बाद में खाने वाली थी!” यह सुनकर सुरेश जी की हालत खराब हो गई। उन्होंने तुरंत हाथ जोड़कर कहा, “मुझे लगा कोई खजाना मिला है।”
पत्नी हँसने लगीं और बोलीं, “खजाना मिला था तो मुझे भी बता देते।” सुरेश जी बोले, “मुझे लगा खजाना मिल गया, लेकिन मेरी किस्मत तो हमेशा मिठाई से पहले ही खत्म हो जाती है।”
शाम को सुरेश जी ने वादा किया कि अब बिना पूछे किसी डिब्बे को नहीं खोलेंगे। लेकिन मन ही मन सोचते रहे कि अगली बार अगर खजाना मिला तो पहले पत्नी को नहीं, पड़ोस के बच्चे को बुलाकर जांच करवाएंगे।
उस दिन सुरेश जी की आँखें सचमुच फटी की फटी रह गईं, और मिठाई का रहस्य भी खुल गया।