आज रिजल्ट आने वाला दिन था। राजू सुबह से ही अजीब सी बेचैनी में घूम रहा था। कभी मोबाइल देखता, कभी पानी पीता, कभी अपनी कॉपी खोलकर पढ़ने का नाटक करता। उसे पूरा भरोसा था कि इस बार वह पास तो जरूर हो जाएगा, लेकिन मन के किसी कोने में डर भी बैठा था।
दोपहर होते ही स्कूल की वेबसाइट खुल गई। राजू ने काँपते हाथों से रोल नंबर डाला। स्क्रीन पर रिजल्ट का बटन चमक रहा था। उसने आँखें बंद करके दो बार भगवान का नाम लिया और फिर क्लिक कर दिया।
जैसे ही रिजल्ट खुला, राजू के चेहरे से सारी रंगत उड़ गई। दिल की धड़कन तेज हो गई और उसे लगा जैसे पैरों के नीचे जमीन ही नहीं है। स्क्रीन पर लिखा था—“असफल।”
राजू को ऐसा लगा जैसे किसी ने अचानक गुब्बारे की हवा निकाल दी हो। उसका दोस्त सोनू पास बैठा था। उसने धीरे से पूछा, “क्या हुआ भाई?”
राजू ने सिर्फ इतना कहा, “हवा निकल गई।”
सोनू ने स्क्रीन देखकर कहा, “अरे, एक विषय में फेल है, पूरी जिंदगी खत्म नहीं हुई।”
लेकिन राजू को उस समय कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। उसे लग रहा था जैसे सपनों की उड़ान अचानक रुक गई हो।
घर जाकर राजू चुपचाप बैठ गया। माँ ने पूछा, “रिजल्ट कैसा आया?”
राजू ने धीमे से कहा, “इस बार किस्मत ने साथ नहीं दिया।”
माँ ने प्यार से उसके सिर पर हाथ रखा और बोली, “रिजल्ट सिर्फ एक पड़ाव है, जिंदगी नहीं।”
उस रात राजू देर तक सोचता रहा। उसे समझ आया कि असफलता भी एक शिक्षक होती है।
अगले दिन उसने फैसला किया कि वह फिर से मेहनत करेगा। दोस्तों ने मजाक में कहा, “अब तो तू टॉपर बनकर ही दम लेगा।”
राजू मुस्कुराया और बोला, “हवा निकली जरूर थी, लेकिन हिम्मत नहीं।”
और वह नए जोश के साथ अपनी किताबें खोलकर भविष्य की तैयारी करने लगा।