राजेश को मोहब्बत का ऐसा बुखार चढ़ा कि उसने फैसला कर लिया—आज प्रेम पत्र लिखकर ही रहेगा। उसने बड़े ध्यान से गुलाबी कागज लिया, सुगंधित इत्र छिड़का और दिल के सारे भाव उसमें उंडेल दिए।
उसने लिखा, “प्रिय प्रिया, तुम्हारी मुस्कान मेरे दिल का चाँद है, तुम्हारी आँखें मेरे सपनों का आसमान हैं, और तुम्हारी चुप्पी मेरे जीवन का सबसे मधुर संगीत है।”
पत्र लिखकर वह बड़े गर्व से पोस्ट ऑफिस गया और उसे डाकपेटी में डाल दिया। रास्ते भर सोचता रहा, “अब तो प्यार की गाड़ी पटरी पर दौड़ेगी।”
पाँच दिन बाद जवाब आया। राजेश ने काँपते हाथों से लिफाफा खोला। अंदर से सिर्फ दो लाइन का जवाब था।
“धन्यवाद आपका पत्र मिला। कृपया भविष्य में ऐसे पत्र भेजकर समय और कागज की बर्बादी न करें।”
राजेश का चेहरा ऐसा हो गया जैसे किसी ने चॉकलेट दिखाकर नमक दे दिया हो। उसने फिर से पत्र पढ़ा—शायद कोई छिपा संदेश मिल जाए, लेकिन जवाब बिल्कुल सीधा और ठंडा था।
उसने दोस्त को फोन किया, “भाई, प्रेम पत्र पर टका सा जवाब मिला है।” दोस्त हँसकर बोला, “आजकल प्यार भी सरकारी फाइल जैसा हो गया है।”
अगले दिन राजेश ने हिम्मत जुटाकर दूसरा पत्र लिखा। इस बार उसने लिखा, “अगर प्यार स्वीकार नहीं है तो कम से कम मुस्कान का एक स्माइली भेज देना।”
एक हफ्ते बाद फिर जवाब आया—“मुस्कान भेजना संभव नहीं है, कृपया अगली बार पत्र न भेजें।”
राजेश उदास हो गया, पर उसने हार नहीं मानी। उसने सोचा, “सच्चा प्रेम तो पत्थर दिल को भी पिघला देता है।”
तीसरा पत्र लिखकर उसने अंत में लिखा, “अगर आप जवाब नहीं देना चाहतीं तो कम से कम यह बता दें कि मैं पत्र भेजना बंद कर दूँ।”
कुछ दिन बाद एक छोटा सा पोस्टकार्ड आया जिस पर लिखा था—“हाँ, कृपया बंद कर दें।”
राजेश ने आसमान की तरफ देखा और मुस्कुराकर बोला, “प्रेम में सफलता मिले या नहीं, पर ईमानदार जवाब जरूर मिला।” और फिर उसने प्रेम पत्र लिखने की डायरी बंद कर दी, लेकिन दिल के किसी कोने में प्यार की उम्मीद मुस्कुराती रही।