शादी के बाद रमेश बड़े उत्साह से अपनी ससुराल पहुँचा। मन में सपना था कि ससुराल वाले उसे राजा की तरह रखेंगे। लेकिन जैसे ही वह दरवाजे पर पहुँचा, उसके साले ने मुँह बनाकर कहा, “जीजा जी आ गए… अब चाय कौन बनाएगा?”
रमेश मुस्कुराया और अंदर चला गया। सासू माँ ने प्यार से पूछा, “खाना खाया या अभी भूखे ही घूम रहे हो?” रमेश ने सोचा आज तो दाल गलेगी, बोला, “माँ जी, आपके हाथ का खाना खाने का मन है।” सासू माँ ने कहा, “ठीक है, सब्जी काटने में मदद कर दो।”
रमेश सब्जी काटने लगा, पर आलू ऐसे कटे जैसे पहाड़ पर चढ़ाई कर रहे हों। साले ने पीछे से कहा, “जीजा जी, शादी के बाद आदमी किचन में भी प्रमोशन ले लेता है।”
खाने की मेज पर रमेश ने बड़े प्यार से रोटी उठाई। पहले निवाला लेते ही नमक ज्यादा लग गया। दूसरी रोटी में मिर्च इतनी थी कि आँखों से पानी निकल आया। सासू माँ बोलीं, “बेटा, आजकल नमक कम खाना चाहिए।”
रात को रमेश को सोने के लिए ड्राइंग रूम में गद्दा मिला। उसने सोचा था ससुराल में राजा की तरह सोएगा, पर मच्छर सेना ने हमला कर दिया। रमेश ने पंखा तेज किया तो बिजली चली गई। उसने कहा, “लगता है ससुराल वालों ने भी सोच लिया, दामाद को थोड़ा तपाया जाए।”
सुबह साले ने कहा, “जीजा जी, आज बाजार चलेंगे।” रमेश खुश हो गया। पर बाजार में साले ने पाँच किलो सब्जी और दस किलो फल खरीदवा दिए। रमेश ने धीरे से कहा, “इतना सामान किसके लिए?” साले ने मुस्कुराकर कहा, “घर वालों के लिए, और बिल… जीजा जी भरेंगे।”
तीसरे दिन रमेश ने सोचा अब घर वापसी ही ठीक है। उसने पत्नी से कहा, “लगता है मेरी दाल ससुराल में नहीं गलेगी।” पत्नी हँसकर बोली, “चिंता मत करो, यहाँ दाल नहीं, सिर्फ तुम्हारा प्यार गलेगा।”
रमेश मुस्कुराया और मन ही मन बोला, “ससुराल में दाल नहीं गली, पर प्यार की खिचड़ी जरूर पक गई।” और फिर वह अगली छुट्टी का इंतजार करने लगा।