रवि को गणित बिल्कुल पसंद नहीं था। वह विज्ञान और हिंदी में अच्छा था, लेकिन जैसे ही गणित की कॉपी खुलती, उसका सिर घूमने लगता। उस दिन शिक्षक ने गृहकार्य में एक कठिन सवाल दे दिया था, जिसे देखकर रवि की हालत खराब हो गई।
घर आकर उसने कॉपी खोली और सवाल पढ़ा। सवाल इतना लंबा था कि पहली बार पढ़ने में ही उसे लगा जैसे किसी पहेली की दुनिया में आ गया हो। उसने पेंसिल उठाई, फिर रख दी। मन में सोचा कि पहले थोड़ा आराम कर ले, फिर हल करेगा।
थोड़ी देर मोबाइल देखने के बाद उसने फिर से कॉपी उठाई। इस बार उसने सवाल को दो बार जोर से पढ़ा। समीकरण में कई चरण थे और हर चरण उसे नया पहाड़ लग रहा था। उसने मन ही मन गिनती शुरू की, लेकिन बीच में ही उलझ गया।
रवि ने अपने छोटे भाई से पूछा, “तुझे गणित आता है?” भाई ने साफ मना कर दिया और कहा, “मैं तो सिर्फ कहानी पढ़ता हूँ।” फिर रवि ने पड़ोस की बड़ी बहन से मदद मांगी, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी उन्हें भी अपना काम खत्म करना है।
अब रवि अकेला रह गया। उसने ठान लिया कि आज चाहे जितना समय लगे, सवाल हल करके ही रहेगा। उसने सबसे पहले दिए गए आंकड़ों को ध्यान से लिखा। फिर धीरे-धीरे हर चरण को समझने की कोशिश की। कई बार गलती हुई, तो उसने मिटाकर फिर से लिखा।
करीब एक घंटे बाद रवि का सिर सचमुच खपने लगा। उसे लगने लगा कि गणित का यह सवाल किसी जादुई पहेली जैसा है। लेकिन अचानक उसे एक तरीका समझ आया, जिसे उसने कक्षा में ध्यान से सुना था।
उसने वही तरीका अपनाया और कुछ ही मिनटों में जवाब मिल गया। रवि खुशी से उछल पड़ा। उसे अपनी मेहनत पर गर्व महसूस हुआ।
अगले दिन स्कूल में शिक्षक ने कॉपी चेक करते समय मुस्कुराकर कहा कि रवि ने सही जवाब लिखा है। उस दिन रवि ने समझ लिया कि मुश्किल सवाल से डरना नहीं चाहिए, बल्कि धैर्य से उसका सामना करना चाहिए। गणित का सवाल भले ही सिर खपाए, लेकिन हल होने के बाद वही सबसे बड़ी जीत बन जाता है।