आज मोहल्ले के मैदान में साल का सबसे बड़ा क्रिकेट मैच होने वाला था। राजेश और उसकी टीम पिछले एक महीने से इस मैच की तैयारी कर रही थी। दूसरी तरफ से जो टीम थी, वह अपने आपको बहुत मजबूत मानती थी और बार-बार राजेश की टीम का मजाक उड़ाती थी। इसी बात ने राजेश का खून खौला दिया था।
मैच शुरू हुआ तो राजेश की टीम ने पहले बल्लेबाजी की। शुरुआत अच्छी नहीं रही। दो विकेट जल्दी गिर गए। दर्शक भी शोर मचा रहे थे। राजेश तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आया। मैदान में उतरते ही उसने गहरी सांस ली और गेंदबाज को घूरकर देखा। गेंद फेंकी गई तो उसने जोरदार शॉट लगाया और गेंद सीधे सीमा पार चली गई।
उसके साथी खिलाड़ियों ने तालियाँ बजाईं। राजेश का आत्मविश्वास बढ़ गया। अगली गेंद पर उसने एक और चौका जड़ दिया। विपक्षी टीम के खिलाड़ी आपस में बात करने लगे। गेंदबाज बार-बार अपनी लाइन बदल रहा था, लेकिन राजेश का बल्ला रुकने का नाम नहीं ले रहा था।
धीरे-धीरे स्कोर आगे बढ़ने लगा। राजेश ने अर्धशतक पूरा किया तो दर्शक भी उत्साहित हो गए। तभी एक तेज गेंद आई और राजेश थोड़ा चूक गया। गेंद हवा में ऊपर उठी और ऐसा लगा कि वह आउट हो जाएगा। पूरा मैदान शांत हो गया।
लेकिन किस्मत साथ थी। गेंद फील्डर के हाथ से फिसल गई और राजेश बच गया। उस समय उसका खून सचमुच खौल उठा। उसने मन ही मन कहा कि अब वह कोई गलती नहीं करेगा।
आखिरी ओवरों में राजेश ने तेजी से रन बनाए और उसकी टीम ने अच्छा स्कोर खड़ा कर दिया। विपक्षी टीम जब बल्लेबाजी करने आई तो राजेश खुद फील्डिंग कर रहा था। उसने एक शानदार कैच पकड़कर मैच का रुख बदल दिया।
आखिरी गेंद पर विपक्षी टीम को जीत के लिए छह रन चाहिए थे। गेंद फेंकी गई, बल्लेबाज ने जोर लगाया लेकिन गेंद सीधे राजेश के हाथों में चली गई।
मैच खत्म हुआ और राजेश की टीम जीत गई। उसके साथी उसे कंधों पर उठाकर मैदान में घूमने लगे। उस दिन राजेश ने महसूस किया कि खेल में गुस्सा नहीं, बल्कि जुनून काम आता है। उसका खून खौला जरूर था, लेकिन उसी ने जीत की राह भी दिखाई।