आरव ने जिंदगी में कई प्रेज़ेंटेशन दिए थे, सैकड़ों लोगों के सामने आत्मविश्वास से बोला था, लेकिन पहली डेट का नाम सुनते ही उसके हाथ-पैर ढीले पड़ गए। अनन्या से उसकी मुलाकात एक दोस्त की बर्थडे पार्टी में हुई थी। दो-तीन बार चैट के बाद आखिरकार मिलने का दिन तय हुआ। जगह चुनी गई एक शांत-सा कैफे, जहां हल्का संगीत और कॉफी की खुशबू माहौल को खास बना रही थी।
डेट वाले दिन आरव ने कम से कम चार शर्ट ट्राई कीं। हर बार उसे लगता, “यह बहुत फॉर्मल है… यह बहुत कैज़ुअल है…”। आखिरकार उसने एक हल्की नीली शर्ट पहनी, जो उसे खुद पर ठीक लगी। फिर भी दिल की धड़कनें काबू में नहीं आ रही थीं। कैफे पहुंचते-पहुंचते उसके माथे पर पसीने की बूंदें चमकने लगीं, जबकि अंदर ठंडी हवा चल रही थी।
अनन्या पहले से वहां बैठी थी। उसे देखते ही आरव की घबराहट दोगुनी हो गई। वह मुस्कुराई तो लगा जैसे सारी टेंशन खत्म हो जाएगी, लेकिन जैसे ही वह कुर्सी खींचकर बैठा, उसका हाथ टेबल पर रखे पानी के गिलास से टकरा गया। गिलास तो बच गया, पर उसकी हालत और खराब हो गई। उसने तुरंत माफी मांगी। अनन्या हंस पड़ी और बोली, “आराम से, मैं इंटरव्यू लेने नहीं आई हूं।”
उसकी इस बात ने माहौल हल्का कर दिया। धीरे-धीरे बातचीत शुरू हुई—ऑफिस की मजेदार बातें, स्कूल की शरारतें, और पसंदीदा फिल्मों की चर्चा। आरव ने महसूस किया कि वह अब सहज हो रहा है। पसीना भी जैसे साथ छोड़ने लगा था। अनन्या उसकी सादगी पर मुस्कुरा रही थी, और उसे अच्छा लग रहा था कि वह बनावटी बनने की कोशिश नहीं कर रहा।
कॉफी खत्म होते-होते दोनों के बीच एक सहज दोस्ती पनप चुकी थी। बाहर हल्की बारिश शुरू हो गई थी। कैफे से निकलते समय अनन्या ने मजाक में कहा, “अगली बार टिश्यू ज्यादा लाना।” आरव ने हंसते हुए जवाब दिया, “अगली बार पसीना कम होगा।”
घर लौटते हुए आरव के चेहरे पर सुकून था। पहली डेट पर पसीने जरूर छूटे थे, लेकिन उसी घबराहट में एक सच्ची शुरुआत छिपी थी। उसे समझ आ गया था कि प्यार में परफेक्ट होना जरूरी नहीं, सच्चा होना जरूरी है।