राहुल की शादी पूरे मोहल्ले की सबसे चर्चित घटना थी। महीनों से तैयारियाँ चल रही थीं। हल्दी, संगीत और मेहंदी के बाद शादी वाले दिन सुबह एक खास रस्म के तहत उसका सिर मुंडवाया गया। पंडित जी ने कहा था कि यह परंपरा सौभाग्य लाती है। राहुल आईने में खुद को देखकर मुस्कुरा रहा था, तभी आसमान का रंग बदलने लगा।
बारात निकलने ही वाली थी कि अचानक तेज़ हवाएं चलने लगीं। देखते ही देखते बादल गरजे और ओले गिरने लगे। छतों पर टप-टप की आवाज़ गूंज उठी। रिश्तेदार जो अभी तक नाच रहे थे, कुर्सियों के नीचे शरण लेने लगे। राहुल अपने नए-नवेले साफे को बचाने की कोशिश कर रहा था, पर सिर तो पहले ही मुंडा हुआ था। दोस्त चुटकी लेने लगे, “देखो, सिर मुंडाते ही ओले पड़े!”
दुल्हन पक्ष में भी खलबली मच गई। टेंट वाले प्लास्टिक ढकने लगे, डीजे ने मशीन बचाई और घोड़ी बेचैन होकर हिनहिनाने लगी। राहुल ने सोचा कहीं यह कोई अपशकुन तो नहीं। तभी उसकी दादी हंसते हुए बोलीं, “अरे पगले, प्रकृति भी तेरी शादी में कंफेटी बरसा रही है।” सबके चेहरे पर मुस्कान लौट आई।
ओले धीरे-धीरे रुक गए और मौसम साफ होने लगा। ठंडी हवा चलने लगी, जिससे गर्मी में भी राहत मिली। बारात थोड़ी देर से सही, पर पूरे जोश से निकली। लोग हंसी-मजाक करते हुए रास्ते भर इस घटना को यादगार बताते रहे। शादी स्थल पर पहुंचते ही इंद्रधनुष दिखा, जिसे सबने शुभ संकेत माना।
फेरे शांत माहौल में संपन्न हुए। दुल्हन ने मुस्कुराकर राहुल से कहा, “देखो, हमारी शादी को आसमान भी याद रखेगा।” राहुल ने भी हंसकर जवाब दिया, “कम से कम सिर पर ओलों का असर नहीं पड़ा।”
अगले दिन जब लोग विदाई के बाद बातें कर रहे थे, तो यही किस्सा सबसे ज्यादा दोहराया जा रहा था। जो पल पहले चिंता का कारण था, वही अब हंसी और खुशियों की याद बन चुका था। राहुल और उसकी दुल्हन ने समझ लिया कि जिंदगी में अचानक आने वाले ओले भी कभी-कभी कहानी को खास बना देते हैं, और अंत में खुशियां ही जीतती हैं।