हमारे मोहल्ले में एक सुबह बड़ी हलचल मच गई। गुप्ता जी के घर से रात को मिठाइयों का डिब्बा और चांदी की छोटी कटोरी गायब हो गई थी। गुप्ता जी बार-बार कह रहे थे, “यह काम किसी अपने का ही है।” बात फैलते ही पूरा मोहल्ला जासूस बन गया।
शक की सुई सबसे पहले पांडे जी पर गई, क्योंकि वे हर शादी-ब्याह में मिठाई के डिब्बे पर खास नजर रखते थे। लेकिन पांडे जी ने कसम खाई कि वे डायबिटीज़ के मरीज हैं, मिठाई से दूर रहते हैं। फिर निगाहें शर्मा जी पर टिकीं, जिनकी दाढ़ी नई-नई फैशन में बढ़ी थी।
तभी किसी बच्चे ने फुसफुसाकर कहा, “देखो-देखो, शर्मा अंकल की दाढ़ी में कुछ फंसा है!” सबकी नजरें एक साथ उनकी दाढ़ी पर टिक गईं। सचमुच एक छोटा-सा तिनका अटका हुआ था। माहौल में सन्नाटा छा गया। किसी ने धीरे से कहा, “चोर की दाढ़ी में तिनका!”
शर्मा जी घबरा गए। पसीना-पसीना होते हुए बोले, “अरे यह तो सुबह पार्क में टहलते समय फंस गया होगा।” लेकिन भीड़ को अब मसाला मिल चुका था। गुप्ता जी ने आंखें तरेरते हुए पूछा, “रात को कहाँ थे आप?”
शर्मा जी बोले, “घर पर ही था, टीवी देख रहा था।” तभी उनकी पत्नी बोलीं, “हाँ, और बीच-बीच में रसोई में भी जा रहे थे।” अब तो शक और गहरा गया। किसी ने मजाक में कहा, “मिठाई चखने गए होंगे।”
इतने में मोहल्ले का छोटा चिंटू भागता हुआ आया। उसके हाथ में वही चांदी की कटोरी थी। सब चौंक गए। चिंटू बोला, “कल मैं ही खेलते-खेलते ले गया था। मिठाई भी मैंने और मोनू ने खा ली।”
कुछ पल की खामोशी के बाद ठहाका गूंज उठा। शर्मा जी ने राहत की सांस ली और दाढ़ी से तिनका निकालकर बोले, “देख लिया, बेगुनाह की दाढ़ी में भी तिनका फंस सकता है!”
गुप्ता जी शर्मिंदा हुए, लेकिन हंसी रोक नहीं पाए। उस दिन से मोहल्ले में जब भी कोई बेवजह घबराता, लोग मुस्कुराकर कहते—“भाई, दाढ़ी संभालकर रखना!”