जीवन में खुश रहना है तो पहले ये मानो,
हर मुस्कुराता चेहरा अपना है—ये मत जानो।
कुछ लोग बस वाई-फाई जैसे होते हैं,
पास हों तो सिग्नल, दूर हों तो सोते हैं।
सब “भाई-भाई” कहकर गले लगाते हैं,
जरूरत पड़े तो मोबाइल साइलेंट पाते हैं।
चाय पर बड़े-बड़े वादे हो जाते हैं,
काम के वक्त सब गुम हो जाते हैं।
फैमिली ग्रुप में सब दिल भेजते हैं,
ऑफलाइन में हाल नहीं पूछते हैं।
स्टेटस पर “हम साथ हैं” लिखते हैं,
साथ देने में पसीने से भीगते हैं।
कुछ अपने सिर्फ त्योहारों में खिलते हैं,
बाकी दिन यादों में ही मिलते हैं।
रिश्तों की दुकान बड़ी निराली है,
यहाँ “सेल” में भी भाव-ताव की लाली है।
जो सच में अपने होते हैं,
वे कम बोलते पर संग होते हैं।
बाकी बस भीड़ बढ़ाने आते हैं,
फोटो खिंचवा कर घर को जाते हैं।
इसलिए दिल का दरवाज़ा सोच समझ खोलो,
हर “अपना” कहने वाले पर मत डोलो।
भ्रम का चश्मा जब उतारोगे यार,
तभी सच्ची खुशी देगी दस्तक बार-बार।