जरूरी नहीं कि गलती करने से ही दुख मिले,
कभी-कभी ज्यादा अच्छे बनो तो भी बिल मिले।
हमने सोचा भलाई में ही भला है,
दुनिया बोली, ये तो सीधा-सा भला है।
हर किसी को हाँ में हाँ मिलाई,
अपनी ही नींद उधार चढ़ाई।
दोस्त ने कहा, जरा नोट दिला दो,
हम बोले, ले लो, और क्या दिला दो।
रिश्तेदार बोले, तुम तो बहुत न्यारे,
काम पड़े तो सबसे पहले तुम्हारे।
ऑफिस में भी यही कहानी,
मेहनत हमारी, वाहवाही अनजानी।
ना कहना सीखा ही नहीं,
इसलिए चैन देखा ही नहीं।
जितना झुको उतना झुकाते,
फिर कहते, तुम तो बड़े भाते।
एक दिन हमने थोड़ा सा टाला,
सबने बोला, देखो बदला ये निराला।
तब समझ आया सीधा फंडा,
ज्यादा मिठास भी बनती पंगा।
अब भलाई भी सोच समझकर करते,
दिल रखते, पर दिमाग भी धरते।
अच्छा बनो पर थोड़ा सयाना,
वरना बन जाओगे सबका बहाना।
हँसते-गाते यही सिखाना,
अच्छाई में भी बैलेंस लाना।