इस संसार में आपका समय सीमित है,
हर सांस का हिसाब निर्धारित है।
इसलिए भीड़ को खुश करने में मत खोइए,
अपनी आत्मा की आवाज़ को संजोइए।
समाज हर पल राय बदलता है,
पर मन का सच स्थिर रहता है।
लोगों की तालियाँ क्षणिक होती हैं,
आत्मा की शांति अनंत होती है।
दूसरों की अपेक्षाएँ अंतहीन हैं,
पर आपकी इच्छाएँ ही प्रामाणिक हैं।
जो सबको रास आए,
वह स्वयं को भूल जाए।
स्वीकृति की दौड़ थका देती है,
पर सच्चाई सुकून दे देती है।
अपनी राह खुद चुनिए,
अपने सपनों को गुनिए।
हर निर्णय दिल से कीजिए,
भीतर की आवाज़ ही लीजिए।
क्योंकि समय लौटकर नहीं आता,
और पछतावा साथ रह जाता।
जीवन छोटा है, यह जान लीजिए,
आत्मा को संतुष्ट करना मान लीजिए।
समाज कल भी कुछ कहेगा,
पर आपका मन ही सच सहेगा।