गलत लोग गलती करके भी शर्मिंदा नहीं होते।
सही लोग इल्ज़ाम सुनकर ही टूट जाते हैं।
झूठे चेहरे अक्सर बेखौफ ही रहते हैं।
सच्चे दिल बेवजह ही रोते रहते हैं।
दोषी लोग सिर ऊँचा करके चलते हैं।
निर्दोष लोग नज़रें झुकाकर ही चलते हैं।
छल करने वाले खुलकर हँसते रहते हैं।
सत्य वाले भीतर ही सिसकते रहते हैं।
अपराधी हर रात चैन से सोते हैं।
निर्दोष हर रात जागते ही रहते हैं।
झूठ को भीड़ सहारा देती रहती है।
सच को तन्हाई घेरे रहती है।
धोखा देने वाले आगे बढ़ जाते हैं।
ईमान वाले पीछे रह जाते हैं।
दुनिया अक्सर उलटी चलती रहती है।
कसौटी सच्चों पर ही पड़ती है।
फिर भी सच कभी झुकता नहीं।
उसका उजाला कभी रुकता नहीं।
इल्ज़ाम इंसान को तोड़ भी देता है।
समय हर सच को जोड़ भी देता है।