सच की मुस्कान
कोई मेरे बारे में गलत कहे,
तो उससे बस इतना पूछना।
क्या तुम मुझे ठीक से जानते हो,
या यूँ ही मन हल्का कर रहे हो।
मैं वैसा नहीं जैसा सुनाई देता हूँ,
मैं वैसा हूँ जैसा निभाई देता हूँ।
कुछ लम्हों से फैसला मत करना,
पूरी कहानी सुने बिना मत भरना।
मैंने रिश्तों को सहेज कर रखा है,
हर अपने को दिल में रखा है।
अगर कभी गलत समझा गया हूँ,
तो शायद कम समझा गया हूँ।
मेरा इरादा साफ रहा है,
हर कदम पर दिल साथ रहा है।
लोग बातें बनाते रहेंगे,
हम मुस्कान सजाते रहेंगे।
क्योंकि सच को सफाई नहीं चाहिए,
उसे बस थोड़ी समझ चाहिए।
जो मुझे जानता है, वो मुस्कुराता है,
जो नहीं जानता, वो अफवाहें फैलाता है।
मैं दिल से जीता हूँ हर पल,
न किसी से द्वेष, न कोई छल।
इसलिए जो पूछे, उसे प्यार से बताना,
मैं जैसा हूँ, वैसा ही रहना।