रखा करो नज़दीकियाँ,
ज़िंदगी का भरोसा नहीं,
कौन कब बिछड़ जाए,
इसका कोई किस्सा नहीं।
आज जो साथ बैठा है,
कल वही दूर हो सकता है।
बातें अधूरी रह जाती हैं,
आँखें नम हो जाती हैं।
फिर कहते हैं लोग अक्सर,
चुपचाप चले गए, बताया भी नहीं।
समय हाथ से फिसल जाता है,
रिश्ता बस याद बन जाता है।
इसलिए अपनों को थामे रखो,
दिल से उन्हें बाँधे रखो।
नाराज़गी लंबी मत करना,
खामोशी गहरी मत करना।
एक गले लगना काफी है,
टूटे मन के लिए वही माफी है।
क्योंकि ज़िंदगी रुकती नहीं,
और मौत बताती नहीं।
इसी जीवन की भीड़ में,
एक सुकून का कोना है।
वो है माँ की हँसी,
जो हर दर्द का सोना है।
हँसती हुई माँ से ज्यादा खूबसूरत कुछ नहीं,
उसकी मुस्कान से बढ़कर कोई सूरत नहीं।
उसकी हँसी में घर बसता है,
उसके बिना सब सूना लगता है।
जब वो मुस्कुराकर देखती है,
हर थकान खुद ही बहती है।
उसके चेहरे की चमक निराली,
जैसे सुबह की पहली लाली।
उसकी हँसी में दुआएँ बसती हैं,
हर संताप वहीं पिघलती हैं।
रातों की नींदें उसने खोईं,
ताकि हमारी राहें हों रोशन हुईं।
उसके आँचल में सारा जहाँ,
वही है मेरा सबसे बड़ा आसमाँ।
इसलिए अपनों से प्यार जताओ,
माँ को हर दिन गले लगाओ।
नज़दीकियाँ ही असली धन हैं,
रिश्ते ही जीवन के वन हैं।
कल का भरोसा किसने देखा,
आज को ही अपना लेखा।
हँसती रहे माँ हर सुबह-शाम,
यही है जीवन का सबसे सुंदर नाम।