तीन लोग अक्सर परेशान दिखे।
वफादार, मददगार, दिल के सच्चे।
जो सच के साथ खड़े रहते हैं,
वही अक्सर अकेले रहते हैं।
जो हरदम साथ निभाते हैं,
वही सबसे ज्यादा आज़माए जाते हैं।
जो बिना स्वार्थ के हाथ बढ़ाते हैं,
वही तानों से नवाज़े जाते हैं।
जिनके इरादे पाक होते हैं,
उनके रास्ते ही कठिन होते हैं।
बाकी दोगले मुस्कुराते हैं,
हर माहौल में ढल जाते हैं।
चापलूस हर दर पर सजते हैं,
हर कुर्सी के आगे झुकते हैं।
सच बोलने वाले खटकते हैं,
झूठ बोलने वाले चमकते हैं।
पर वक्त की अपनी पहचान है,
उसका न्याय बड़ा महान है।
जो भीतर से सच्चे होते हैं,
अंत में वही ऊँचे होते हैं।
दोगलापन ज्यादा चल नहीं पाता,
झूठ ज्यादा पल नहीं पाता।