बेइज़्ज़ती का जवाब उन्नति है।
अपमान का उत्तर प्रगति है।
जो ताने सुनाए गए,
उन्हें लक्ष्य बनाना चाहिए।
जो हँसे थे राह में,
उन्हें परिणाम दिखाना चाहिए।
आँसू बहाकर क्या मिलेगा,
हौसला बढ़ाकर सब मिलेगा।
गिरकर उठना सीख लो,
चुप रहकर जीतना सीख लो।
शोर से नहीं पहचान बनती,
मेहनत से उड़ान बनती।
अपमान एक परीक्षा है,
साहस की परिभाषा है।
जो भीतर आग जला दे,
वही किस्मत बदलवा दे।
बदला शब्दों से नहीं,
कर्मों से लिया जाता है।
सम्मान माँगा नहीं जाता,
योग्यता से पाया जाता है।
इसलिए समय को साथी बनाओ,
खुद को इतना ऊँचा उठाओ।
कि जिनकी नज़रें झुकी न थीं,
वो खुद नज़रें झुका जाएँ।