जो कम में खुश है, वही अमीर है,
जिसका मन संतुष्ट है, वही धनी है।
सोने-चाँदी से क्या होगा,
अगर दिल में कमी होगी।
थाली में सादा रोटी सही,
पर चेहरे पर मुस्कान सही।
छोटा सा घर अगर अपना हो,
तो महल भी फीका सपना हो।
जिसे चाहतें सीमित रखनी आएँ,
उसे चिंताएँ छू न पाएँ।
लालच की आग जो बुझा दे,
वही जीवन को सजा दे।
कम साधन पर ऊँचे विचार,
यही हैं असली उपहार।
जिसे हर पल का धन्यवाद है,
उसी के पास असली प्रसाद है।
न शिकायत, न कोई ग़म,
बस संतोष से भरा हर दम।
जिसकी नींद सुकून भरी है,
वही दौलत सबसे बड़ी है।
खुशियों का जो रखवाला है,
वही किस्मत का मतवाला है।
इसलिए कम में खुश रहना सीखो,
यही अमीरी दिल में !