संबंध ही एक ऐसा वृक्ष है
जो भावनाओं के सामने झुक जाता है
स्नेह की मिट्टी से अंकुरित होता है
और विश्वास की बारिश से सींचा जाता है
प्यार की धूप में धीरे-धीरे बढ़ता है
मन के आँगन में चुपचाप खड़ा रहता है
मीठे शब्द इसकी जड़ें मजबूत करते हैं
झूठे वचन इसे अंदर से तोड़ देते हैं
सादगी की हवा इसे जीवन देती है
सम्मान की छाया इसे शांति देती है
क्रोध की आँधी इसे घायल कर जाती है
अहंकार की चिंगारी इसे जलाकर जाती है
रिश्तों का सच बहुत नाजुक होता है
एक गलत शब्द भी भारी बोझ होता है
संबंधों को दिल से संभालकर रखना
स्नेह के जल से हर दिन सींचते रहना
संबंध ही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है
इसी में खुशियों की असली गूंज है