घमंड के अंदर बुरी बात यही होती है
वो कभी महसूस नहीं होने देता कि तुम गलत हो
अहंकार चुपके से मन में घर कर जाता है
सच को भी अपने रंग में ढलने को कहता है
जो झुकना जानता है वही ऊँचा उठता है
घमंड का पौधा अक्सर खुद ही सूखता है
अहंकार में डूबा दिल सच नहीं सुन पाता
अपने ही शब्दों का भार सह नहीं पाता
गलती हर इंसान से कभी न कभी होती है
मगर घमंड में छिपकर आँखें बंद रहती हैं
सच की आवाज़ को सुनना बड़ा कठिन होता है
अहंकार का साया बड़ा घना घिरा होता है
जो अपने को सही समझता है, वही हार जाता है
समय के आगे आखिर सब कुछ झुक जाता है
नम्रता ही जीवन की असली पहचान है
सादगी में छिपा सबसे बड़ा सम्मान है
घमंड के अँधेरे में खुशियाँ खो जाती हैं
सच की राहें ही दिल तक लौट आती हैं