चौदह वर्ष वनवास सहा, एक उम्र कटी रोते-रोते
तब जाकर बात समझ आई, सोने के हिरण नहीं होते
सपनों के पीछे भागना भी कभी अंधा रास्ता है
हर चमकती चीज़ में अक्सर झूठा सा अहसास है
माया के जाल बड़े ही चुपके से फैलते हैं
मन के सच्चे मोती धीरे-धीरे ही मिलते हैं
जो दिखता है सोना, वह सच में सोना नहीं होता
हर चमकता चेहरा अपने भीतर रोना नहीं होता
आशाओं के जंगल में भ्रम भी पनप जाते हैं
स्वार्थ के पंछी भी मीठे गीत सुनाते हैं
धैर्य ही जीवन का सबसे बड़ा सहारा है
सच का दीपक ही सबसे उजला तारा है
दुनिया के रंगों में खुद को मत खो देना
झूठी दौलत की नींद में सपनों को मत सोना
कठिन तपस्या ही मन का सोना बनाती है
सादगी की राह ही असली मंज़िल पाती है
समय सिखाता है सबक धीरे-धीरे
सोने के हिरण नहीं होते, समझ लो दिल के घेरे