मैं उस भीड़ से दूर रहता हूँ
जहाँ लोग अपना होने का नाटक करते हैं
मैं खामोश गलियों को चुन लेता हूँ
जहाँ सच के दीपक अक्सर जलते हैं
झूठी मुस्कानों का शोर मुझे अच्छा नहीं लगता
दिल के सौदागरों का दौर मुझे अच्छा नहीं लगता
मैं सादगी के पंखों पर उड़ना चाहता हूँ
अपने सपनों का आकाश खुद गढ़ना चाहता हूँ
जहाँ अपनापन सिर्फ शब्दों में नहीं हो
जहाँ रिश्ते केवल स्वार्थ की गर्द में नहीं हो
मैं उन चेहरों को पढ़ना सीख गया हूँ
जो हँसकर भी दर्द छुपाना सीख गया हूँ
भीड़ में भी अपनी पहचान रखता हूँ
अकेलेपन में भी मुस्कान रखता हूँ
सच्चे दिलों का साथ ही मेरी दुनिया है
सादगी भरा एहसास ही मेरी बुनियाद है
मैं उस भीड़ से दूर, अपने मन के पास हूँ
सच्चाई के साथ हूँ, और खुशियों का एहसास हूँ