तुझसे शिकायत भी क्यूँ, तेरे सामने ही मेरा ये हाल है
तेरी खामोशी भी जैसे दिल के हर सवाल का जवाब है
तेरी नज़रें पढ़ लेती हैं मेरे अनकहे एहसासों को
तू ही तो है जो समझता है मेरे टूटे हुए ख़्वाबों को
मैंने चाहा नहीं कभी कोई और तेरे सिवा
मेरी हर दुआ में बस तेरा ही नाम लिखा
तेरी हँसी से रोशन मेरे मन का हर कोना है
तेरे बिना ये दिल जैसे अधूरा सा सपना है
हवा भी छूकर तुझे मेरे पास चली आती है
तेरी खुशबू मेरी साँसों में घर कर जाती है
चाँद भी जैसे तेरी सूरत का दीवाना है
तेरे संग ही मेरा जीवन का अफ़साना है
दूर होकर भी तू मेरे दिल के सबसे पास है
मेरी हर धड़कन में तेरा ही एहसास है
मैं तुझसे प्यार करूँ या खुद को समेटूँ अब
तेरे सामने ही मेरा सारा जहां बसा है रब
तुझसे शिकायत भी क्यूँ, तुझमें ही मेरा प्यार है
तेरे ही नाम से मेरा हर इंतज़ार है