मंज़िल मिट्टी है, पर रास्ता रंगों से भरा है
हर एक पल में जैसे खुशियों का पहरा खड़ा है
धूप भी हँसती है जब मन में उजाला हो
आशाओं का हर दीपक सपनों से न्यारा हो
फूलों की खुशबू से दिन अपना सज जाता है
छोटी सी मुस्कान से सारा ग़म उड़ जाता है
हवा भी गीत गाती है पत्तों की भाषा में
जीवन झूम उठता है मन की अभिलाषा में
बूँदें जब गिरती हैं धरती का गान बने
बच्चों की हँसी जैसे जीवन की पहचान बने
उड़ते हुए पंछी भी आकाश लिख जाते हैं
मेहनत की कहानी हर दिल को समझाते हैं
चलते रहो चुपचाप, कदमों में विश्वास रहे
सूरज की तरह अपना हर सपना पास रहे
रातें भी कहती हैं सुबह जरूर आएगी
उम्मीद की चादर हर अंधेरे पर छाएगी
खुशियों का संगीत दिल के अंदर बजता रहे
हर इंसान अपने भीतर उत्सव सा रचता रहे
मंज़िल मिट्टी है, पर सफ़र सुहाना है
जीवन तो खुश होकर बस आगे बढ़ जाना है