बुजुर्ग कहते हैं यह बात पुरानी।
फसल रंग बदले तो काट दो जानी।
मेहनत का फल समय पर लेना।
उपज को व्यर्थ नहीं रहने देना।
पर लोगों का रंग जब बदल जाए।
रिश्तों की डोर अगर टूट जाए।
तो समझदारी से दूरी रखना।
अपने मन को साफ़ रखना।
फसल में भी मौसम का खेल है।
जीवन भी अनुभवों का मेल है।
जो पक जाए, वही काम का है।
समय पर करना ही नाम का है।
लोगों के रंग पहचानना सीखो।
सच और झूठ को परखना सीखो।
हर किसी पर भरोसा नहीं करना।
अपने सम्मान को कम नहीं करना।
बुजुर्गों की बातें काम की होती हैं।
जीवन की राहें आसान होती हैं।
समय सिखाता है सबक अनोखा।
समझदार बनता हर एक मौका।