अंत में कुछ भी ठीक नहीं होता।
अंत में सिर्फ अंत ही होता।
किसी के सपनों का अंत होता है।
किसी की उम्मीदों का अंत होता है।
किसी की भावनाएँ टूट जाती हैं।
यादें चुपचाप सो जाती हैं।
किसी के किरदार का अंत होता है।
कहानी का एक अध्याय बंद होता है।
समय अपने पंख समेट लेता है।
सच भी चुपचाप लेट जाता है।
हँसी भी कहीं खो जाती है।
आँखें बस नम हो जाती हैं।
जो था, वह पीछे रह जाता है।
जो है, वह भी बदल जाता है।
सपनों की राहें मिट जाती हैं।
इच्छाएँ धीरे थक जाती हैं।
अंत एक मौन सा संदेश है।
जीवन का अपना विशेष है।
शुरुआत भी अंत में छुपी रहती है।
नई कहानी फिर जन्म लेती है।