हमेशा याद रखिए यह बात।
ज्यादा बोझ डुबो देता है साथ।
क्रोध का बोझ मन पर मत रखो।
शांति का दीपक भीतर ही रखो।
बदले की आग भी जलाती है।
धीरे धीरे आत्मा गलाती है।
अभिमान का भार भारी होता है।
अंत में सब बेकार होता है।
जो बोझ उठाए, वही थकता है।
समय के आगे सब झुकता है।
हल्का मन ही आगे चलता है।
सच का सूरज उसी में पलता है।
नफ़रत का बोझ मत ढोना कभी।
दिल को घायल मत करना सभी।
मोहब्बत से राह आसान बनती है।
जिंदगी खुद मुस्कान चुनती है।
छोड़ दो जो मन को भारी करे।
साधारण जीवन ही सार भरे।
जो हल्का चले, वही जीतता है।
शांति में ही जीवन जीता है।