किसी से मिलते ही फैसला ना किया करो।
इंसान है, परतों में धीरे खुलता है।
पहली नज़र में सच कहाँ मिलता है।
हर चेहरा अंदर कुछ और रखता है।
हँसी के पीछे भी दर्द छुपा रहता है।
खामोश आँखों में शोर छुपा रहता है।
हर बात को समझने का वक्त चाहिए।
हर राज़ को खुलने का हक चाहिए।
जल्दी में किसी को परखो मत।
दिल की किताब यूँ ही पढ़ो मत।
हर शख्स कहानी लेकर चलता है।
हर जख्म निशानी लेकर चलता है।
शब्दों से ज्यादा चुप्पी बोलती है।
धीरे से ही सच्चाई खोलती है।
परत दर परत पहचान बनती है।
समय से ही तस्वीर साफ़ होती है।
नफ़रत भी अक्सर डर से जन्मती है।
मोहब्बत भी अंदर से ही पलती है।
धैर्य रखो, समझ बढ़ती जाएगी।
इंसानियत खुद राह दिखाएगी।