इस संसार में समय सीमित है।
भीतर की आवाज़ ही सही जीत है।
हर किसी को खुश करना जरूरी नहीं।
अपनी आत्मा को संतुष्ट करना ही सही।
लोगों की भीड़ बदलती रहती है।
उनकी सोच भी चलती रहती है।
अपनी राह खुद चुननी होती है।
दिल की बात भी सुननी होती है।
झूठी तारीफों का जाल न बुनो।
सच के दीपक मन में चुनो।
दिखावे की दुनिया से दूर रहो।
अपने सच्चे स्वरूप में ही रहो।
समाज की मंज़ूरी जरूरी नहीं है।
स्वाभिमान से बड़ी कोई खुशी नहीं है।
अपनी शांति को मत खोना कभी।
अंदर की रोशनी को संजोना सभी।
समय एक दिन चुपचाप जाएगा।
सिर्फ कर्म ही साथ निभाएगा।
आत्मा संतुष्ट रहे यही प्रार्थना है।
जीवन की सबसे बड़ी साधना है।
खुद से प्रेम करना सीख लो।
सच्चे सत्य को ही जी लो।